देश के 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिये शीर्ष न्यायालय में जनहित याचिका

देश के 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिये शीर्ष न्यायालय में जनहित याचिका

देश के 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिये शीर्ष न्यायालय में जनहित याचिका
Modified Date: November 29, 2022 / 08:18 pm IST
Published Date: December 24, 2020 10:03 am IST

नयी दिल्ली, 24 दिसंबर (भाषा) देश के 22वें विधि आयोग को ‘सांविधिक संस्था’ घोषित करने और एक महीने के भीतर इसके अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के लिये उच्चतम न्यायालय में बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका दायर की गयी।

भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने यह जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि 21वें विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 को समाप्त हो गया था। लेकिन केन्द्र सरकार ने न तो उसका कार्यकाल बढ़ाया और न ही अभी तक 22वें विधि आयोग का गठन किया है।

याचिका के अनुसार, ‘‘हालंकि केन्द्र ने 19 फरवरी, 2020 को 22वें विधि आयोग के गठन के फैसले की घोषणा की थी लेकिन इसके लिये अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां अभी तक नही हुयी हैं।’’

याचिका में केन्द्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह यथाशीघ्र 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करे। साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया है कि न्यायालय को वैकल्पिक उपाय के रूप में अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आवश्यक पहल करनी चाहिए।

उपाध्याय ने विधि आयोग को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि नेताओं और अपराधियों की सांठगांठ के बारे में वोहरा समिति की रिपोर्ट पर विचार करने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में काला धन, बेनामी संपत्ति और आय के ज्ञात स्रोत से अधिक अर्जित की गई संपत्ति पूरी तरह से जब्त करने तथा ऐसे लोगों के चुनाव लड़ने पर जीवन भर के लिये प्रतिबंध लगाने के बारे में भी विधि आयोग को विचार कर अपनी रिपोर्ट पेश करने के वास्ते निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

भाषा अनूप

अनूप सुभाष

सुभाष


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