घर के बगल में सार्वजनिक शौचालय, कूड़ेदान सम्मान से जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन : न्यायालय

घर के बगल में सार्वजनिक शौचालय, कूड़ेदान सम्मान से जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन : न्यायालय

घर के बगल में सार्वजनिक शौचालय, कूड़ेदान सम्मान से जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन : न्यायालय
Modified Date: February 20, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: February 20, 2026 3:42 pm IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में व्यवस्था दी कि किसी के घर के बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और कूड़ेदान का होना संविधान के तहत स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का एक अभिन्न अंग है और स्वस्थ वातावरण का अभाव गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को बाधित करता है।

अदालत ने यह आदेश एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें उसने अपनी संपत्ति की पूर्वी दीवारों पर अनधिकृत रूप से बनाए गए खुले कूड़ेदान और मूत्रालय के खिलाफ दाखिल की थी।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसके पड़ोस के लगभग 150 निवासी उक्त स्थान पर अपना कूड़ा फेंकते थे तथा कूड़ेदान और मूत्रालय के पास स्वच्छता बनाए रखने के लिए एमसीडी अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता के घर के बगल में सार्वजनिक कूड़ेदान और मूत्रालय ‘निसंदेह एक परेशानी’ का कारण है और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को उसे तुरंत ध्वस्त करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने 16 फरवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘स्वच्छ जीवन के अभिन्न पहलुओं में से एक स्वच्छ वातावरण है। स्वच्छ वातावरण का अभाव याचिकाकर्ता के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। याचिकाकर्ता के घर के ठीक बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और खुले कूड़ेदान की उपस्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत उसके जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार शामिल है।’’

अदालत ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह सूखे और गीले कचरे के लिए एक उचित ढका हुआ कूड़ेदान उपलब्ध कराए और उसे याचिकाकर्ता की संपत्ति से कुछ दूरी पर रखे।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश


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