पंजाब के मुख्यमंत्री मान का सामाजिक बहिष्कार किया जाए : प्रदेश कांग्रेस

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पंजाब के मुख्यमंत्री मान का सामाजिक बहिष्कार किया जाए : प्रदेश कांग्रेस

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 08:04 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 08:04 PM IST

चंडीगढ़, 24 जून (भाषा) कांग्रेस की पंजाब इकाई ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर अपना हमला तेज करते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की और साथ ही उनके सामाजिक बहिष्कार का भी आह्वान किया।

कांग्रेस ने मान के खिलाफ धार्मिक बेअदबी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी की ओर से यह मांग हरियाणा पुलिस द्वारा मान से जुड़े विवाद वाले एक वीडियो पर कथित तौर पर फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने के आरोप में दो लोगों की गिरफ्तारी के एक दिन बाद आई।

राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)पर निशाना साधते हुए कहा कि वह पड़ोसी राज्य में सत्ता में है और जो चाहे कर सकती है।

पंजाब प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने लोगों से अपील की कि वे अकाल तख्त के निर्देशों के अनुसार मान का पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार करें। अकाल तख्त ने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित करते हुए उनके खिलाफ एक आदेश जारी किया था।

पार्टी नेताओं ने कहा कि ‘सिख पंथ’ और गुरु दलीय विभाजन सहित सभी मुद्दों से परे हैं।

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मान के इस्तीफे की मांग को लेकर यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया। इस संवाददाता सम्मेलन में पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक सुखपाल खैरा और परगट सिंह और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के संयुक्त कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला मौजूद थे।

वडिंग ने कहा कि मान के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस एकमत है। उन्होंने कहा कि मान को अकाल तख्त के सामने पेश होकर माफी मांगनी चाहिए।

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के अध्यक्ष ने कहा कि गुरुग्राम (हरियाणा) में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, यह स्पष्ट हो गया कि आप सरकार किस तरह ‘‘अपने झूठ को छिपाने की कोशिश कर रही है।’’

उन्होंने कहा कि आप के कुछ नेताओं को भी यह एहसास हो गया था कि उनसे ऐसी बातों का बचाव करवाया जा रहा है जिनका बचाव करना मुमकिन नहीं है।

वडिंग ने हरियाणा की भाजपा सरकार की मंशा पर शक जताते हुए दावा किया कि पड़ोसी राज्य की पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया था।

जालंधर के सांसद चन्नी ने कहा कि मान एक ‘आदतन अपराधी’ साबित हुए हैं।

मुख्यमंत्री के बहिष्कार की पार्टी की अपील को दोहराते हुए चन्नी ने कहा कि हर सिख का यह फर्ज है कि वह अकाल तख्त के आदेश का पालन करे और मान का बहिष्कार करे।

उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस का कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री के साथ कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक संवाद नहीं करेगा।

मान के इस्तीफे की मांग करते हुए चन्नी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सिखों की सर्वोच्च संस्था, अकाल तख्त के अधिकार को कमज़ोर करने की कोशिश की है।

चन्नी ने कहा कि मान के खिलाफ धार्मिक बेअदबी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

सांसद रंधावा ने कहा कि पार्टी इस बात पर एकमत है कि मान को इस्तीफा देना चाहिए और न सिर्फ उनके खिलाफ बल्कि वित्त मंत्री हरपाल चीमा और आप नेता बलतेज पन्नू के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर अकाल तख्त को गलत साबित करने की साजिश रची।

उन्होंने ‘फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट’ तैयार करवाने के लिए भुगतान किये गए 10 लाख रुपये के स्रोत की जांच की भी मांग की।

विजय इंदर सिंगला ने बताया कि अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने के सभी मौके और अवसर दिए।

उन्होंने कहा कि यह वही आप है जिसने धार्मिक बेअदबी के पुराने मामलों में न्याय दिलाने के नाम पर वोट मांगे थे, लेकिन अब अकाल तख्त से टकराव की नीति अपना रही है।

कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया कि सिख संस्थाओं को ‘कमजोर’ करने के मामले में आप ने अकाली दल को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक से अकाल तख्त के जत्थेदार के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे ‘दुर्भावनापूर्ण’ अभियान को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की अपील की।

विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि मान सीधे तौर पर अकाल तख्त के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं।

हरियाणा पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत पर मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज करके दो लोगों को गिरफ्तार किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित विवाद से जुड़े वायरल वीडियो की फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट की व्यवस्था कराने के लिए उससे संपर्क किया गया था।

यह घटनाक्रम एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर पैदा हुए राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है। इस मामले में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने 15 जून को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ एक आदेश जारी किया था।

आदेश अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के इस दावे के बाद जारी किया गया था कि दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने उस वीडियो को “प्रामाणिक” पाया है। वीडियो में कथित तौर पर भगवंत मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति नजर आ रहा है।

भाषा धीरज नरेश

नरेश