पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के लिए अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान

पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के लिए अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान

पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के लिए अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान
Modified Date: January 15, 2026 / 06:27 pm IST
Published Date: January 15, 2026 6:27 pm IST

अमृतसर, 15 जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख परंपराओं और सिद्धांतों के बारे में कथित टिप्पणियों को लेकर तलब किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को तख्त सचिवालय के समक्ष पेश हुए।

उन्होंने बृहस्पतिवार को अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने से पहले स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका।

मान ने बाद में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने अपना स्पष्टीकरण अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि जवाब की विस्तृत जांच की जाएगी, जिसके बाद निर्देश दिए जाएंगे।

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मान ने कहा कि वह एक धर्मनिष्ठ सिख के रूप में अपना स्पष्टीकरण देने के लिए अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष उपस्थित हुए और वह सचिवालय द्वारा दिए गए किसी भी निर्देश का पालन करेंगे।

जत्थेदार गरगज्ज ने पांच जनवरी को ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे की दानपेटी) पर कथित रूप से टिप्पणी करने और ‘‘सिख गुरुओं’’ व आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के संबंध में ‘‘आपत्तिजनक गतिविधियों’’ में लिप्त पाए जाने के आरोप में तलब किया था।

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो पर जत्थेदार की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर मान ने कहा कि वीडियो फर्जी या कृत्रिम मेधा (एआई) द्वारा निर्मित है, जिसकी पुष्टि देश की किसी भी फोरेंसिक प्रयोगशाला में की जा सकती है।

मान पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं, जिन्हें अकाल तख्त सचिवालय ने तलब किया है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को 1986 में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ के तहत स्वर्ण मंदिर में पुलिस कार्रवाई का आदेश देने के लिए तनखैया (धार्मिक दुराचार का दोषी) घोषित कर उनका बहिष्कार किया गया था।

उन्होंने दो साल बाद प्रायश्चित किया था।

‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ अप्रैल 1986 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर से चरमपंथियों और आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए चलाया गया था।

मान ने अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेशी से पहले बृहस्पतिवार को कहा कि सोशल मीडिया पर यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि वह अकाल तक़्त के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं।

मान ने पत्रकारों से कहा कि वह कभी भी अकाल तख्त के सर्वोच्च अधिकार को चुनौती नहीं देंगे।

जत्थेदार ने कहा था कि मान ने जानबूझकर ‘‘सिख विरोधी मानसिकता’’ व्यक्त की और ‘दसवंध’ या ‘तिथे’ (किसी आय या उपज का दसवां हिस्सा) के सिद्धांत के खिलाफ बार-बार ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियां कीं जिसमें कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा पूजा स्थल को दान करने की प्रथा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘‘आपत्तिजनक वीडियो’’ का हवाला देते हुए गरगज्ज ने दावा किया था कि सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ मान की हरकतें अपमानजनक थीं। जत्थेदार ने कहा था कि मान के ‘‘सिख विरोधी’’ बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं।

गरगज्ज ने कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘पतित’ (एक सिख जो अपने बाल कटवाता है) हैं और उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता है, इसलिए उन्हें अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए अकाल तख्त के सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है।

मान ने कहा था कि वह अकाल तख्त के सामने मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक विनम्र और धर्मनिष्ठ सिख के रूप में पेश होंगे।

उन्होंने अकाल तख्त की सर्वोच्चता के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा को दोहराया। मान ने हाल में कहा था, ‘‘श्री अकाल तख्त साहिब जी का कोई भी आदेश या निर्देश मुझे पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार्य है और मैं उसका पालन करूंगा। श्री अकाल तख्त साहिब जी मेरे लिए सर्वोपरि हैं। उस पवित्र तख्त से प्राप्त किसी भी आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा।’’

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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