पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के मामले में अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान

पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के मामले में अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान

पंजाब: सिख परंपराओं पर टिप्पणी के मामले में अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए मान
Modified Date: January 15, 2026 / 11:12 pm IST
Published Date: January 15, 2026 11:12 pm IST

अमृतसर, 15 जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख परंपराओं और सिद्धांतों के बारे में कथित टिप्पणियों को लेकर तलब किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेश हुए।

उन्होंने बृहस्पतिवार को अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने से पहले स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका।

मान एक घंटे से अधिक समय तक सचिवालय में उपस्थित रहे।

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मान ने बाद में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने अपना स्पष्टीकरण अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज को सौंप दिया है।

सूत्रों के अनुसार, सचिवालय में तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार बाबा टेक सिंह और जत्थेदार गरगज्ज उपस्थित थे।

मान अपने साथ दस्तावेजों से भरा एक सूटकेस लेकर आए थे और उन्होंने इसे कार्यक्रम स्थल पर जमा कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जत्थेदार साहब के आदेशानुसार, मैं एक विनम्र सिख के रूप में यहां उपस्थित हुआ और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।” उन्होंने कहा,“श्री अकाल तख्त साहिब संपूर्ण सिख समुदाय के लिए सर्वोच्च प्राधिकरण है और मेरे लिए भी वही सर्वोच्च है। जत्थेदार साहब ने मेरा बयान दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई ‘सिंह साहिबानों’ से परामर्श के बाद की जाएगी।”

मान ने कहा, “मैं जत्थेदार साहब के हर निर्णय का पालन करूंगा। यहां उपस्थित होने से मुझे अपार संतोष, आंतरिक शांति और संतुष्टि प्राप्त हुई है।”

जत्थेदार गरगज्ज ने पांच जनवरी को ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे की दानपेटी) पर कथित रूप से टिप्पणी करने और ‘‘सिख गुरुओं’’ व आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के संबंध में ‘‘आपत्तिजनक गतिविधियों’’ में लिप्त पाए जाने के आरोप में मान को तलब किया था।

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो पर जत्थेदार की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर मान ने कहा कि वीडियो फर्जी या कृत्रिम मेधा (एआई) द्वारा निर्मित है, जिसकी पुष्टि देश की किसी भी फोरेंसिक प्रयोगशाला में की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों लोगों की भावनाओं के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने जत्थेदार को 25,000 से 30,000 पन्नों की शिकायतें सौंपी हैं।

उन्होंने कहा, “ये शिकायतें उन लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं, जिन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के कामकाज में विभिन्न अनियमितताओं को उजागर किया है। मैंने जत्थेदार साहब से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया है कि वे इन शिकायतों की जांच कराएं, क्योंकि लाखों लोगों की भावनाएं इनसे जुड़ी हैं।”

मान ने कहा, “संस्थाएं सर्वोपरि होती हैं, जबकि उनके प्रमुख व्यक्ति गलती कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को उनके कृत्यों के लिए किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।”

मान पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं, जिन्हें अकाल तख्त सचिवालय ने तलब किया है।

पूर्व में मई 1986 में, पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अकाली दल के दिग्गज नेता सुरजीत सिंह बरनाला को धार्मिक दुराचार का दोषी ठहराया गया था।

अकाल तख्त के जत्थेदार ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता सुखबीर बादल को 2007 से 2017 के बीच पार्टी और उसकी सरकार द्वारा की गई ‘गलतियों’ के लिए ‘तनखैय्या’ घोषित किया।

बादल भी 2024 में धार्मिक दंड के लिए सिख संस्था के समक्ष पेश हुए थे।

मान ने अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेशी से पहले बृहस्पतिवार को कहा कि सोशल मीडिया पर यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि वह अकाल तख्त के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं।

मान ने पत्रकारों से कहा कि वह कभी भी अकाल तख्त के सर्वोच्च अधिकार को चुनौती नहीं देंगे।

जत्थेदार ने कहा था कि मान ने जानबूझकर ‘‘सिख विरोधी मानसिकता’’ व्यक्त की और ‘दसवंध’ या ‘तिथे’ (किसी आय या उपज का दसवां हिस्सा) के सिद्धांत के खिलाफ बार-बार ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियां कीं जिसमें कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा पूजा स्थल को दान करने की प्रथा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘‘आपत्तिजनक वीडियो’’ का हवाला देते हुए गरगज्ज ने दावा किया था कि सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ मान की हरकतें अपमानजनक थीं। जत्थेदार ने कहा था कि मान के ‘‘सिख विरोधी’’ बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं।

गरगज्ज ने कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘पतित’ (एक सिख जो अपने बाल कटवाता है) हैं और उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता है, इसलिए उन्हें अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए अकाल तख्त के सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है।

मान ने कहा था कि वह अकाल तख्त के सामने मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक विनम्र और धर्मनिष्ठ सिख के रूप में पेश होंगे।

उन्होंने अकाल तख्त की सर्वोच्चता के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा को दोहराया। मान ने हाल में कहा था, ‘‘श्री अकाल तख्त साहिब जी का कोई भी आदेश या निर्देश मुझे पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार्य है और मैं उसका पालन करूंगा। श्री अकाल तख्त साहिब जी मेरे लिए सर्वोपरि हैं। उस पवित्र तख्त से प्राप्त किसी भी आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा।’’

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत


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