पुरी, 18 जुलाई (भाषा) ओडिशा के बारिश प्रभावित पुरी में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरिबोल’ के उद्घोष के बीच लाखों श्रद्धालु शनिवार शाम उस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने, जिसके तहत रथ यात्रा उत्सव के हिस्से के रूप में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का गुंडिचा मंदिर में प्रवेश हुआ।
12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचे रथों पर पुष्पांजलि समेत अन्य अनुष्ठान पूरे होने के बाद शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे देवताओं की ‘पहंडी’ शुरू हुई। परंपरा के अनुसार, तीनों देवताओं की प्रतिमाएं रातभर रथों पर ही विराजमान रहीं।
मंदिर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि रथ यात्रा के हिस्से के रूप में आयोजित ‘अडापा मंडप बिजे’ अनुष्ठान के तहत देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को रथों से गुंडिचा मंदिर के गर्भगृह में ले जाया गया।
तीनों देवी-देवता सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर (भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का जन्मस्थान) में रहेंगे और 24 जुलाई को ‘बहुदा यात्रा’ (वापसी रथ यात्रा) के तहत मुख्य मंदिर (जगन्नाथ मंदिर) में लौटेंगे।
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि रथों पर विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन और ‘अडापा मंडप बिजे’ अनुष्ठान में शामिल होने के लिए पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह अनुष्ठान पुरी में रथ यात्रा के पहले चरण के समापन का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालु श्री गुंडिचा मंदिर के सामने स्थित रेत के मैदान ‘सारधा बाली’ में एकत्र हुए।
बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं के प्रबंधन के वास्ते ओडिशा पुलिस ने दर्शन के लिए सख्त एकतरफा व्यवस्था लागू की है, ताकि तीर्थयात्रियों की आवाजाही सुचारु बनी रहे और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस वर्ष रथ यात्रा उत्सव के दौरान बृहस्पतिवार को भीड़ अचानक बढ़ने और खराब मौसम के कारण दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग बीमार पड़ गए थे।
भाषा प्रचेता संतोष
संतोष