राजस्थान उच्च न्यायालय ने चुनाव संबंधी याचिका की खारिज, विधायक बनावत पर एक लाख का जुर्माना

राजस्थान उच्च न्यायालय ने चुनाव संबंधी याचिका की खारिज, विधायक बनावत पर एक लाख का जुर्माना

राजस्थान उच्च न्यायालय ने चुनाव संबंधी याचिका की खारिज, विधायक बनावत पर एक लाख का जुर्माना
Modified Date: June 30, 2026 / 12:10 pm IST
Published Date: June 30, 2026 12:10 pm IST

जयपुर, 30 जून (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में बयाना से चुनी गईं निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि विधायक ने अपनी संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ हो या जो भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता हो।

हालांकि, न्यायमूर्ति सुदेश बंसल की एकल पीठ ने चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान लंबे समय तक समन से बचने के कारण ऋतु बनावत पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

अदालत ने कहा कि उनके इस आचरण से न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक रूप से करीब 10 महीने की देरी हुई।

अदालत ने सोमवार को विधायक ऋतु बनावत को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर यह राशि याचिकाकर्ता को अदा करें।

यह चुनाव याचिका बयाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके पुरुषोत्तम लाल ने दायर की थी।

उन्होंने आरोप लगाया था कि ऋतु बनावत ने नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत किए गए फॉर्म-26 में अपनी संपत्तियों, देनदारियों, बैंक खातों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का पूरा खुलासा नहीं किया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि शपथ—पत्र के कई कॉलम खाली छोड़ दिए गए थे और कुछ जानकारियां जानबूझकर छिपाई गई थीं, जिससे मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन हुआ।

रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि प्रत्याशी के रूप में बनावत द्वारा कथित रूप से कोई जानकारी छिपाने या उसका खुलासा नहीं करने से चुनाव परिणाम पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा या यह चुनाव कानूनों के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

अदालत ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं कि शपथ—पत्र में कथित कमियों से मतदाता गुमराह हुए या चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।

साथ ही पीठ ने लंबे समय तक समन से बचने के विधायक के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि इस तरह के व्यवहार से न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई और चुनाव विवाद के निस्तारण में अनावश्यक देरी हुई।

अदालत ने कहा कि भले ही अंततः चुनाव वैध पाया गया हो, लेकिन किसी भी पक्षकार को न्यायालय की कार्यवाही को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और ऐसे आचरण के वित्तीय परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इसी के साथ अदालत ने चुनाव याचिका खारिज करते हुए ऋतु बनावत पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उन्हें 30 दिन के भीतर यह राशि याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया।

भाषा बाकोलिया

वैभव

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