राजस्थान : हाल में जंगल में बसाए गए नर बाघ को भा रहा नया माहौल
राजस्थान : हाल में जंगल में बसाए गए नर बाघ को भा रहा नया माहौल
कोटा, 14 जुलाई (भाषा) राजस्थान में नियंत्रित माहौल से दोबारा प्राकृतिक वातावरण में बसाने की योजना के तहत करीब 18 दिन पहले खुले जंगल में छोड़े गए नर बाघ को नया माहौल रास आ रहा है और उसने पहली बार शिकार तथा अपने इलाके की निशानदेही की है। वन अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि 18 दिन पहले ‘जंगल में छोड़ने से पूर्व तैयार करने के लिए बनाए गए बाड़े’ से आरवीटी-07 नामक बाघ को खुले जंगल में छोड़ा गया था और उसपर नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बताया कि बाघ के व्यवहार से संकेत मिलता है कि वह जंगल के माहौल में सफलतापूर्वक ढल गया है।
वन अधिकारियों ने बताया कि आरवीटी-07 नाम के बाघ का रामगढ़ विषधारी बाघ अभयारण्य (आरवीटीआर) के खुले जंगल में दूसरे बाघों से भी सामना हुआ है, जिससे भविष्य में उनके बीच प्रजनन की संभावना बनती है।
उन्होंने बताया कि साढ़े तीन साल के इस बाघ ने 24 जून, 2026 को अपने पांच हेक्टेयर के बाड़े से स्वेच्छा से बाहर निकलकर, बूंदी, कोटा और भीलवाड़ा ज़िलों में करीब 1500 वर्ग किलोमीटर में फैले बाघ अभयारण्य में प्रवेश किया था।
अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान आरवीटी-07 ने पूरी तरह से स्वाभाविक वन्य जीव की तरह व्यवहार किया, जो जीवित रहने के लिए जरूरी है।
निगरानी टीम ने पाया गया कि बाघ ने पेड़ों को खरोंचा, गंध छोड़ी जिससे उसके इलाके की निशानदेही हुई और मौजूदगी दर्ज की गई और ये गतिविधियां प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक ढलने के अहम संकेत हैं।
उन्होंने बताया कि विशेष बात यह है कि बाघ ने प्राकृतिक परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक शिकार किया है, जिससे उसकी स्वतंत्र रूप से शिकार करने की क्षमता साबित होती है।
राजस्थान में अधिकारियों ने लगभग दो साल पहले दिसंबर 2024 में बचाए गए बाघों को पुन उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना शुरू की।
अधिकारियों ने बताया कि बाघिन की असमय मौत के बाद उसके दो शावकों (एक नर और एक मादा) को बचाया गया था। इसके बाद इन शावकों को कोटा के अभेड़ा जैव उद्यान ले जाया गया, जहां इंसानों की देखरेख में उनकी अच्छी तरह से परवरिश की गई।
राज्य में पहली बार इन वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई और वन विभाग ने नर शावक को बूंदी के आरवीटीआर में और मादा शावक को मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य में भेज दिया।
आरवीटीआर के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) अरुणकुमार डी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नर बाघ को लगभग 18 से 19 महीनों तक अभयारण्य की जैतपुर रेंज में बने पांच हेक्टेयर के विशेष बाघ बाड़े में रखा गया था।
उन्होंने बताया कि इस अहम दौर में, वन्यजीव अधिकारियों ने बाड़े का सावधानी से प्रबंधन किया और बाघ को जंगल में जीवित रहने के लिए तैयार करने हेतु शिकार का खास चयन किया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, विभाग ने बाघ के विकास का आकलन करने के लिए कड़ी और निरंतर निगरानी बनाए रखी।
वन अधिकारी ने बताया, ‘‘हम इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह देखने के लिए हर पल इसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं कि यह अपना इलाका कैसे बनाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस बाघ की गतिविधियों को लगातार रिकॉर्ड करने के लिए जीपीएस-वीएचएफ रेडियो कॉलर, रेडियो टेलीमेट्री, कैमरा और ज़मीनी स्तर पर निगरानी टीम का इस्तेमाल किया जा रहा है।’’
भाषा धीरज मनीषा
मनीषा

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