रथ यात्रा विवाद : बेंगलुरु इस्कॉन ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रुख का समर्थन किया
रथ यात्रा विवाद : बेंगलुरु इस्कॉन ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रुख का समर्थन किया
भुवनेश्वर, 14 जुलाई (भाषा) श्रीला प्रभुपाद द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की बेंगलुरु इकाई ने कहा है कि वह पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा शास्त्रों के अनुसार तय किए गए नौ दिनों के दौरान अपने केंद्रों पर रथ यात्रा आयोजित करेगा। यह फैसला मायापुर मुख्यालय वाले इस्कॉन समूह के इस मामले पर अपनाए गए रुख से अलग है।
इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई ने साथ ही स्पष्ट किया है कि वह दूसरे इस्कॉन समूह से ‘‘अलग और स्वतंत्र संस्था’’ है, जिसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में है।
बेंगलुरु इकाई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इस्कॉन के मायापुर मुख्यालय ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें दुनिया भर में अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा और जगन्नाथ के दूसरे त्योहार आयोजित करने पर ‘फिर से विचार’ करने को कहा गया था। इस्कॉन ने अपने बयान में कहा था कि वह ‘‘सम्मानपूर्वक इस चर्चा से हमेशा के लिए अलग हो रहा है’’।
पुरी की पूर्ववर्ती रियासत के राजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष गजपति महाराज दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने यह मांग पश्चिम बंगाल के मायापुर में मुख्यालय वाले इस्कॉन को पुरानी परंपरा से हटकर स्वयं द्वारा तय तिथि पर भगवान की स्नान यात्रा और रथ यात्रा आयोजित करने से रोका जाए।
एसजेटीएमसी अध्यक्ष को लिखे पत्र में श्रीला प्रभुपाद के इस्कॉन मंदिर समूह ने कहा, ‘‘हम पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की मूल-पीठ की सलाह के अनुसार, नौ दिनों की अवधि के दौरान ‘ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट’ के अपने केंद्रों पर रथ यात्रा आयोजित करेंगे। हम तय तिथि पर स्नान यात्रा की रस्में भी निभाएंगे।’’
बेंगलुरु समूह के शासी आयोग के अध्यक्ष मधु पंडित दास के संदेश में यह भी कहा गया है कि संगठन का यह फैसला सभी ‘सनातनियों’ को भगवान जगन्नाथ और भक्तों की सेवा के लिए एकजुट करेगा।
देब ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि इस्कॉन बेंगलुरु ने 13 जुलाई को मिले पत्र में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के रुख का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।
पत्र में, बेंगलुरु इस्कॉन ने स्पष्ट किया कि वह भारत और विदेश में ‘श्रीला प्रभुपाद के इस्कॉन’ के रूप में जाने जाते हैं। यही संस्थान अक्षय पात्र फाउंडेशन का संचालन करता है।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप

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