राजस्थान के मंत्री ने सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर अपना धरना सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद समाप्त किया

राजस्थान के मंत्री ने सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर अपना धरना सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद समाप्त किया

राजस्थान के मंत्री ने सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर अपना धरना सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद समाप्त किया
Modified Date: August 13, 2026 / 12:25 am IST
Published Date: August 13, 2026 12:25 am IST

जयपुर, 12 अगस्त (भाषा) राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने बुधवार को सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी करने में कथित देरी के मुद्दे पर उनके समर्थन में अपना धरना मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के हस्तक्षेप के बाद समाप्त कर दिया।

इससे पहले, शर्मा सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर बुधवार को अलवर नगर निगम कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए थे।

मंत्री ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में कथित देरी को लेकर जिलाधिकारी और नगर निगम आयुक्त के प्रति कड़ी नाराजगी जतायी थी।

वहीं, राज्य के कांग्रेस नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भाजपा शासन में प्रशासनिक तंत्र के ‘‘पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।’’

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के दखल के बाद अधिकारी हरकत में आए और पांच उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए और साथ ही बाकी आवेदनों पर फैसला लेने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई गई। इसके बाद शर्मा ने धरना खत्म कर दिया।

इससे पहले सुबह शर्मा ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2012 की भर्ती प्रक्रिया के तहत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने नियुक्तिपत्र जारी करने के संबंध में स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक से मार्गदर्शन मांगा था।

शर्मा ने बताया कि कई महीनों की बातचीत और प्रक्रिया के बाद अधिकारियों ने 69 अभ्यर्थियों को नियुक्तिपत्र देने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया रोक दी गई।

उन्होंने कहा कि बुधवार सुबह वाल्मीकि समुदाय के कुछ सदस्य उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें बताया कि अधिकारियों ने नियुक्तिपत्र देने से इनकार कर दिया है।

शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने जिलाधिकारी से बात की, लेकिन उनका रवैया नकारात्मक था। वह अपने रुख पर अड़ी हुई थीं और मामले को सुलझाने के लिए तैयार नहीं थीं। इसलिए मैं नगर निगम कार्यालय आया और समुदाय के सदस्यों के साथ धरने पर बैठ गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इस मामले की जानकारी दी है।’’

जिलाधिकारी अर्तिका शुक्ला से इस संबंध में बात नहीं हो सकी।

बाद में, सरकार के इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश देने के बाद शर्मा ने धरना खत्म कर दिया।

शर्मा ने कहा कि आज पांच उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए क्योंकि उनकी फाइलें पहले से ही तैयार थीं और अन्य पात्र उम्मीदवारों को भी जल्द ही पत्र जारी किए जाएंगे।

इस बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘‘अगर मंत्री अपनी ही सरकार के घोटालों के खिलाफ धरने पर बैठ जाएं, तो सोचिए…सरकार में भाजपाई भ्रष्टाचार का आलम क्या है।’’

डोटासरा ने कहा, ‘‘जब मंत्री स्वयं नौकरशाही पर बेईमानी, लूट-खसोट और मनमानी करने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो सोचिए अराजकता की स्थिति कितनी भयावह है।’’

उन्होंने कहा कि अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर वन मंत्री संजय शर्मा का धरने पर बैठना और जिलाधिकारी व नगर निगम आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाना भाजपा सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

डोटासरा ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जनता सब देख रही है और ढाई साल बाद इस अराजक और भ्रष्ट व्यवस्था की विदाई तय है।’’

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘भाजपा सरकार की असलियत अलवर में खुलकर सामने आ गई है। सफाई कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र तक नहीं मिल रहे और खुद राज्यमंत्री संजय शर्मा को अपनी ही सरकार के नगर निगम के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। यह भाजपा शासन में प्रशासनिक तंत्र के पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिलाधिकारी से बात करने के बावजूद जब अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो मंत्री को खुद सड़क पर बैठकर आंदोलन करना पड़ा। यह दिखाता है कि भाजपा राज में मंत्री सिर्फ नाम के हैं, जबकि असली फैसले नौकरशाही की मर्जी से होते हैं।’’

जूली ने कहा, ‘‘जिस सरकार का अपना मंत्री ही न्याय के लिए भटकता फिरे, वह गरीब सफाई कर्मचारियों और आम जनता को क्या इंसाफ देगी?’’

राज्य सरकार के कामकाज पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार नहीं चल रही, बल्कि अफसरशाही के भरोसे लड़खड़ा रही है। भाजपा को यह बताना चाहिए कि जब उसका अपना मंत्री ही व्यवस्था से त्रस्त है, तो जनता किस मुंह से इस सरकार पर भरोसा करे।’’

भाषा पृथ्वी गोला

गोला


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