गिरफ्तारी और जमानत संबंधी मामलों में आरटीआई को ठुकराने पर राजकोट जीएसटी कार्यालय को फटकार

गिरफ्तारी और जमानत संबंधी मामलों में आरटीआई को ठुकराने पर राजकोट जीएसटी कार्यालय को फटकार

गिरफ्तारी और जमानत संबंधी मामलों में आरटीआई को ठुकराने पर राजकोट जीएसटी कार्यालय को फटकार
Modified Date: February 16, 2026 / 09:43 pm IST
Published Date: February 16, 2026 9:43 pm IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने राजकोट में जीएसटी अधिकारियों को लंबित जांचों का हवाला देते हुए गिरफ्तारी, जमानत, मामलों और बरामदगी से संबंधित जानकारी आरटीआई अधिनियम के तहत देने से इनकार करने के लिए फटकार लगाई और कहा कि इस तरह के व्यापक इनकार से “निश्चित रूप से अपराधियों के साथ मिलीभगत का संदेह पैदा हो सकता है”।

सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि यद्यपि सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8 ऐसी जानकारी को रोकने की अनुमति देती है जो जांच या अभियोजन में बाधा डाल सकती है, लेकिन इस छूट को सभी प्रश्नों पर उनकी प्रकृति की जांच किए बिना “व्यापक तरीके से” लागू नहीं किया जा सकता है।

यह अपील जुलाई 2017 से सितंबर 2023 के बीच राजकोट में जीएसटी प्रवर्तन से संबंधित जानकारी मांगने वाले आरटीआई आवेदन से संबंधित है।

आवेदक ने उन मामलों की संख्या, जिनमें गिरफ्तारियां की गईं, उन मामलों की संख्या जिनमें अभियोजन शिकायतें दर्ज की गईं, गिरफ्तारी के बाद बरामदगी, अदालतों द्वारा जमानत दिए जाने के उदाहरण और जमानत आदेशों के खिलाफ अपील या पुनरीक्षण दायर किए जाने के मामलों की संख्या जैसे विवरण मांगे थे।

जीएसटी विभाग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 8(1)(एच) का हवाला देते हुए अधिकांश जानकारी देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि जांच जारी है तथा खुलासा किए जाने से प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होगी।

आयोग ने हालांकि गौर किया कि अपीलकर्ता ने मुख्य रूप से सांख्यिकीय और संख्यात्मक जानकारी मांगी थी।

आयोग ने टिप्पणी की, “प्रतिवादी यह साबित करने में विफल रहा कि केवल संख्याओं के रूप में व्यापक, गैर-पहचान योग्य सांख्यिकीय जानकारी का खुलासा चल रही जांचों में कैसे बाधा उत्पन्न करेगा। केवल यह दावा करना कि जांच लंबित है, पर्याप्त नहीं है।”

सीआईसी ने कहा कि “पूरी तरह से इनकार करने से निश्चित रूप से अपराधियों/कर चोरों के साथ मिलीभगत का संदेह पैदा होगा, जबकि इसका खुलासा होने से किसी भी प्रकार की मिलीभगत का पर्दाफाश हो जाएगा।”

आरटीआई आवेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश देते हुए, आयोग ने राजकोट स्थित केंद्रीय जीएसटी कार्यालय को तीन सप्ताह के भीतर गिरफ्तारियों, अभियोजनों, जमानतों, अपीलों और बरामदगी से संबंधित एकत्रित जानकारी संख्यात्मक रूप में प्रदान करने का आदेश दिया, केवल ऐसी जानकारी को रोककर रखने की अनुमति होगी जो ठोस औचित्य के साथ आरटीआई अधिनियम के तहत छूट के लिए स्पष्ट रूप से पात्र हो।

भाषा प्रशांत अविनाश

अविनाश


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