राज्यसभा की बैठक हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित

राज्यसभा की बैठक हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित

राज्यसभा की बैठक हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित
Modified Date: August 7, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: August 7, 2026 12:53 pm IST

नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे उच्च सदन की बैठक पुन: शुरू होने पर उच्च सदन में सभापति सी पी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन से पूरक प्रश्न पूछने को कहा।

सुमन ने ट्रेनों में कवच और सिग्नल प्रणाली लगाए जाने से संबंधित विषय पर पूरक प्रश्न पूछने के बजाय कहा कि सदन में गतिरोध कायम है और विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा चाहता है।

सुमन की बात पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और कुछ सदस्य हंगामा करते हुए अपने स्थानों से आगे आ गए। सभापति ने उन्हें उनके नियत स्थानों पर लौट जाने और प्रश्नकाल चलने देने के लिए कहा।

सभापति ने सुमन को अपनी बात पूरी करने का मौका दिए बिना अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम थंबीदुरै से आज की प्रश्नावली में सूचीबद्ध प्रश्न से संबंधित पूरक प्रश्न पूछने के लिए कहा।

थंबीदुरै ने पूरक प्रश्न पूछा और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका जवाब भी दिया। लेकिन हंगामे की वजह से उनकी बात सुनी नहीं जा सकी।

सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की लेकिन अपनी बात का असर न होते देख उन्होंने बारह बज कर चार मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

उच्च सदन की बैठक अब सोमवार, दस अगस्त को पूर्वाह्न ग्यारह बजे होगी।

इससे पहले, उच्च सदन की बैठक जब पूर्वाह्न ग्यारह बजे शुरू हुई तो कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने सदन में गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध किया।

बैठक शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आगामी नौ अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए कहा कि ‘‘करो या मरो’’ के नारे के साथ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के लिए जो संघर्ष किया उसकी वजह से ही हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।

इसके बाद सदन में सदस्यों ने कुछ क्षण मौन रखकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में प्राणों की आहुतियों का बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर की जा रही नारेबाजी को लेकर सभापति ने अप्रसन्नता जतायी।

उन्होंने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसी दौरान विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मानसून सत्र के दौरान संसद में गृह मंत्री की लगातार अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है।

खरगे ने कहा कि सरकार सभापति की टिप्पणियों का भी सम्मान नहीं कर रही है और सदन का अपमान कर रही है।

इससे पहले बृहस्पतिवार को सभापति राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा था कि वह विपक्ष की भावनाओं को गृह मंत्री तक पहुंचाएं और सदन में उनकी मौजूदगी की मांग पर ‘विचार करें’।

विपक्षी दल 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहे हैं।

रिजिजू ने कहा कि सभापति की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया था और विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब सत्र चलता है तब गृह मंत्री पूरे दिन संसद में मौजूद रहते हैं और मंत्री अपने मंत्रालयों के एजेंडे के अनुसार संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा मंत्री कब सदन में आएगा।

रिजिजू ने सभापति से कहा, ‘आपने एक टिप्पणी की थी, लेकिन आसन की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया था।’

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल नारेबाजी करते हैं और फिर संसद से बाहर चले जाते हैं। उन्होंने इस व्यवहार की निंदा की।

हंगामे के बीच सभापति ने शून्यकाल के तहत लोकमहत्व से जुड़े मुद्दे उठाने का आह्वान किया। बीजू जनता दल की सुलता देव, भाजपा के प्रकाश चिक बाराइक और अमरपाल मौर्य तथा भाकपा के पी पी सुनीर ने विभिन्न मुद्दे उठाए।

कार्यवाही शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद भी नारेबाजी जारी रहने पर सभापति ने 11 बजकर 30 मिनट पर बैठक को दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दिया।

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बने होने के कारण उच्च सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है।

भाषा

मनीषा माधव

माधव


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