नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) राज्यसभा ने सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन अपने चार दिवंगत पूर्व सदस्यों बलबीर पुंज, स्वप्न साधन बोस, रंगासायी रामकृष्ण और एच. हनुमनथप्पा के साथ ही कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को श्रद्धांजलि दी।
सुबह, उच्च सदन की बैठक होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन लोगों के निधन होने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बलबीर पुंज ने 2000 से 2006 तक उत्तर प्रदेश का तथा 2008 से 2014 तक ओडिशा का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व किया।
दो अक्टूबर, 1949 को पंजाब के गुरदासपुर जिले के लालोवाल में जन्मे बलबीर पुंज प्रख्यात पत्रकार, लेखक, विचारक और बुद्धिजीवी थे। बलबीर पुंज ने कई प्रशंसित पुस्तकें भी लिखीं जिनमें भारत की सभ्यतागत विरासत, सार्वजनिक नीति और राष्ट्रीय मामलों में उनकी गहरी रुचि झलकती है।
उन्होंने भारत सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय युवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
सभापति राधाकृष्णन ने बताया कि स्वप्न साधन बोस ने 2005 से 2011 तक राज्यसभा में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व किया। 23 जनवरी, 1948 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जन्मे बोस ने देश में फुटबॉल और खेल प्रशासन को बढ़ावा देने और विकसित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
‘टुटू बोस’ के नाम से लोकप्रिय बोस तीन दशकों से अधिक समय तक ऐतिहासिक मोहन बागान एथलेटिक क्लब से जुड़े रहे और इसके अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भारतीय फुटबॉल का प्रतिनिधित्व करते हुए फीफा क्लब टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में भी कार्य किया।
उन्होंने बताया कि रंगासायी रामकृष्ण ने 2012 से 2018 तक उच्च सदन में कर्नाटक राज्य का प्रतिनिधित्व किया। 15 मार्च, 1934 को तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के चिदंबरम में जन्मे रामकृष्ण का सार्वजनिक सेवा में कई दशकों का शानदार करियर रहा।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (राजस्थान कैडर: 1957) के सदस्य के रूप में, उन्होंने राजस्थान सरकार और केंद्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वह जिनेवा में यूरोप के लिए आर्थिक आयोग से भी जुड़े थे। उन्होंने एसोसिएशन ऑफ सिंथेटिक फाइबर इंडस्ट्रीज के महासचिव का पद भी संभाला।
सभापति ने बताया कि हनुमंतप्पा ने 1982 से 2000 के दौरान लगातार तीन कार्यकाल तक उच्च सदन में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया। 13 मई, 1932 को कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के गुद्दाडा रंगवन्ना हल्ली गांव में जन्मे हनुमंतप्पा ने छात्र जीवन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में वह रचनात्मक सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे।
पेशे से वकील रहे हनुमंतप्पा ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें रेलवे सेवा आयोग, बेंगलुरु और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष का पद शामिल है।
सदन ने कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने जून 1995 से जून 2013 तक 18 वर्षों तक कतर के अमीर के रूप में कार्य किया।
सभापति ने कहा कि वह एक दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने आधुनिक कतर की नींव रखी और इसे विकास और समृद्धि की नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत-कतर संबंधों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।
सदस्यों ने दिवंगत लोगों के सम्मान में कुछ क्षणों का मौन रखा।
भाषा माधव अविनाश
माधव