वैश्विक स्तर पर युद्धों व तनाव के बीच शांति का संदेश देने के लिए दिल्ली में ‘रामकथा’ का आयोजन
वैश्विक स्तर पर युद्धों व तनाव के बीच शांति का संदेश देने के लिए दिल्ली में ‘रामकथा’ का आयोजन
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी विभिन्न युद्धों व भूराजनीतिक तनाव के बीच शांति का संदेश देने के लिए दिल्ली में नौ दिवसीय ‘रामकथा’ का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ के साथ बातचीत में कहा कि 17 से 25 जनवरी को भारत मंडपम में ‘रामकथा’ का आयोजन किया जाएगा और कथावाचक मुरारी बापू ‘रामकथा’ के जरिये विश्व शांति के हमारे इस लक्ष्य में साथ देंगे।
लोकेश ने कहा, ‘‘यूक्रेन-रूस, इजराइल-फलस्तीन सहित विश्व में कई जगह युद्ध जारी है जिसमें लाखों लोगों सहित मासूम बच्चों की जान जा रही है। इसके साथ इससे वैश्विक स्तर पर अर्थव्यस्था प्रभावित हो रही है। हमारा मानना है कि युद्ध, आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि हर समस्या का हल केवल बातचीत के जरिये ही मुमकिन है।’’
उन्होंने कहा कि हर युद्ध या विवाद का अंत, अंतत: बातचीत के जरिये ही किया जाता है तो फिर हम पहले ही क्यों नहीं इस रास्ते का चुन लेते।
उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए 17 जनवरी से ‘रामकथा’ का आयोजन किया जा रहा है और अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर आदि कई देशों से लोग इसमें शिरकत करेंगे। ’’
‘रामकथा’ के जरिये विश्व शांति के संदेश के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर आचार्य लोकेश ने कहा, ‘‘ हम प्रभु श्रीराम के जीवन की ओर देखें तो समझ आएगा कि एक इंसान कैसे बेहतर इंसान बन सकता है, लोगों को न्याय कैसे मिले और रामराज्य की स्थापना कैसे हो। रामराज्य का है अर्थ जहां न गरीबी हो, न अभाव हो, न अन्याय हो। यहीं बातें तो विश्व में अशांति का कारण बनती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ जहां अन्याय होगा वहां असमानता होगी, वहां पर अशांति होगी जो आगे चलकर युद्ध का रूप ले सकती है। इसलिए ‘रामकथा’ के जरिये इन सब समस्याओं से निपटने के तरीकों पर जोर देने के साथ ही शांति का संदेश दिया जाएगा और भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाया जाएगा।’’
‘रामकथा’ के आयोजन के दौरान कथावाचक मुरारी बापू के महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर रहने के सवाल पर आचार्य लोकेश ने कहा, ‘‘ जिस अहिंसा की, सत्य की, करुणा की, नींव अतीत में रखी गई थी, उसकी अब भविष्य में भी जरूरत है। इसके लिए राजघाट से अधिक पवित्र स्थान कौन सा हो सकता है। यह एक ऐसा स्थान है जो किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि सार्वजनिक है।’’
लोकेश ने साथ ही बताया कि भारत के उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ‘रामकथा’ के पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर आयोजन में शिरकत करेंगे।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं।
भाषा
निहारिका नरेश
नरेश

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