श्रीनगर, 26 मार्च (भाषा) श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित रघुनाथ मंदिर बृहस्पतिवार को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जब 36 वर्ष बाद इस सौ साल पुराने मंदिर में राम नवमी की पहली पूजा आयोजित की। इस खास अवसर पर न सिर्फ हिंदू श्रद्धालु जुटे, बल्कि उनके मुस्लिम पड़ोसी भी साथ खड़े नजर आए, जिससे माहौल भाईचारे और सौहार्द से भर उठा।
हालांकि, मंदिर में अभी मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम जारी है, फिर भी मंदिर प्रबंधन समिति ने इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाने के लिए पूजा का आयोजन किया।
समिति के महासचिव सुनील कुमार ने बताया, ‘‘36 साल बाद यहां राम नवमी की पूजा हो रही है। हममें से कुछ लोग जम्मू से आए हैं, लेकिन देश-विदेश से कई लोगों ने दान देकर मंदिर के पुनर्निर्माण में सहयोग किया है।’’
उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण अभी ‘‘मूर्ति स्थापना’’ नहीं हो सकी है।
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के सवाल पर सुनील कुमार ने कहा कि यह तब तक संभव नहीं है, जब तक कश्मीरी मुस्लिम समुदाय का सहयोग न मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार हमें एक साल में बसाकर पुनर्वास कर सकती है, लेकिन हमारी वापसी के लिए कश्मीरी मुसलमानों का साथ जरूरी है।’’
इस अवसर पर स्थानीय मुस्लिम निवासी गुलाम हसन भी मंदिर पहुंचे और उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडित और मुसलमान भाई-भाई हैं। हम दशकों से साथ रहते आए हैं।’’
राम नवमी के अवसर पर शहर के अन्य मंदिरों, जैसे शंकराचार्य मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पर्यटकों और सुरक्षा बलों ने भी स्थानीय हिंदू समुदाय के साथ मिलकर उत्सव में भाग लिया।
भाषा गोला रंजन
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