राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के वीआईपी दर्शन पास की आईडी ब्लॉक
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के वीआईपी दर्शन पास की आईडी ब्लॉक
अयोध्या, नौ जुलाई (भाषा) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की डिजिटल आईडी निष्क्रिय कर दी हैं। मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इन आईडी का इस्तेमाल वीआईपी दर्शन पास जारी करने में कथित अनियमितताओं को रोकने के उपायों के तहत किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन की अध्यक्षता वाले नए प्रशासन ने लिया है।
आईडी निष्क्रिय होने के बाद अब इन तीनों लोगों के डिजिटल क्रेडेंशियल या सिफारिशों के माध्यम से कोई भी सुगम या विशिष्ट दर्शन पास जारी नहीं किया जा सकेगा।
यह कदम राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच के बीच उठाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने पाया कि ट्रस्टियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी का बड़ी संख्या में पास बनाने के लिए कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
सूत्रों ने बताया कि इन आईडी का इस्तेमाल उनकी सिफारिश पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वीआईपी दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक टिन्नू यादव ने इस खामी का फायदा उठाकर सैकड़ों अनधिकृत वीआईपी दर्शन पास बनाए। सूत्रों ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के कुछ करीबी सहयोगी भी कथित तौर पर वीआईपी पास जारी करने के नाम पर रैकेट चलाने और अवैध रूप से लाखों रुपये कमाने के मामले में जांच के दायरे में हैं।
जून के पहले सप्ताह में राम मंदिर में दान राशि की गिनती में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया था।
ट्रस्ट की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
इसके बाद एसआईटी को प्रथम दृष्टया गबन के साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और मंदिर की दान-गणना प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे छह जुलाई को स्वीकार कर लिया गया।
उनकी जगह भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी कृष्ण मोहन को नियुक्त किया गया, जिन्होंने इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।
ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है जबकि ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
प्राथमिकी में इन तीनों में से किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है।
हालांकि, कुछ विपक्षी दलों और समाज के कुछ वर्गों ने मंदिर प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ पदों पर उनकी भूमिकाओं को देखते हुए उनसे जवाबदेही की मांग की।
भाषा सं जफर जितेंद्र
जितेंद्र

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