रमेश का सोनोवाल को पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना के पारगमन बंदरगाह पर मांगा स्पष्टीकरण

रमेश का सोनोवाल को पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना के पारगमन बंदरगाह पर मांगा स्पष्टीकरण

रमेश का सोनोवाल को पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना के पारगमन बंदरगाह पर मांगा स्पष्टीकरण
Modified Date: June 22, 2026 / 12:00 pm IST
Published Date: June 22, 2026 12:00 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे माल पारगमन बंदरगाह (ट्रांसशिपमेंट पोर्ट) से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण दें।

पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश इस परियोजना के पारिस्थितिकीय प्रभाव को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं। इस विषय पर वह पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को कई बार पत्र लिख चुके हैं।

रमेश ने सोनोवाल को लिखे पत्र में मंत्री से आग्रह किया कि वह ग्रेट निकोबार द्वीप के गलाथिया खाड़ी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर माल पारगमन बंदरगाह (आईसीटीपी) के विकास के लिए निजी भागीदारी आमंत्रित करने हेतु निविदाएं जारी करने तथा इस परियोजना के लिए निजी सह-स्वामित्व एवं परिचालक के अंतिम चयन की समयसीमा साझा करें।

उन्होंने यह सवाल भी किया कि जब न्यूनतम निजी हिस्सेदारी 55 प्रतिशत निर्धारित की गई है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि 100 प्रतिशत निजी हिस्सेदारी की भी अनुमति होगी या फिर सार्वजनिक संस्थाओं के लिए भी न्यूनतम हिस्सेदारी निर्धारित की जाएगी।

रमेश ने पत्र में कहा, ‘‘मैं आपको उन लोगों की ओर से लिख रहा हूं जो ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना से होने वाली पारिस्थितिकीय तबाही को लेकर चिंतित हैं।’’

उनका कहना है, ‘‘आप अवगत हैं कि वित्त मंत्रालय की सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) ने 17 मार्च और 19 मार्च, 2026 को पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के गलाथिया खाड़ी, ग्रेट निकोबार द्वीप में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर माल पारगमन बंदरगाह विकसित करने के प्रस्ताव पर विचार किया था।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘दो अप्रैल, 2026 को बैठक से जुड़े लिखित विवरण में इस बात का उल्लेख है कि मंत्रालय ने स्वयं परियोजना से जुड़े दो प्रमुख खतरों की पहचान की थी। पहला खतरा बड़े पैमाने पर ग्रीनफील्ड बंदरगाह परियोजना का विकास और दूसरा खतरा मौजूदा स्थापित पारगमन बंदरगाहों से यातायात को आकर्षित कर वहां स्थापित करने की चुनौती संबंधी है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘यह आश्चर्यजनक है कि इन बड़े जोखिमों को स्वीकार करने के बावजूद और निर्माण से होने वाली निश्चित पारिस्थितिकीय क्षति को नजरअंदाज करते हुए भी इस बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।’’

भाषा हक वैभव

वैभव


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