नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या का मामला: जांच सौपने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई 24 अप्रैल को

नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या का मामला: जांच सौपने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई 24 अप्रैल को

नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या का मामला: जांच सौपने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई 24 अप्रैल को
Modified Date: April 20, 2026 / 07:18 pm IST
Published Date: April 20, 2026 7:18 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पिछले महीने चार वर्षीय बच्ची की कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में उसके पिता द्वारा दायर याचिका पर 24 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी।

याचिका में मामले की अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गयी थी।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन से पूछा, “क्या आपने आरोपपत्र देखा है?”

हरिहरन ने कहा कि उन्हें दिए गए आरोपपत्र के कुछ पन्ने पूरी तरह काले हैं।

पुलिस की ओर से अदालत में पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वह याचिकाकर्ता के वकील को पूरा आरोपपत्र उपलब्ध कराएंगी। न्यायालय ने कहा, “पीठ इस मामले में शुक्रवार (24 अप्रैल) को सुनवाई करेगी।”

शीर्ष अदालत ने 13 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच में ‘सुस्ती’ पर सवाल उठाए।

न्यायालय को सूचित किया गया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत तीन अप्रैल को एक आरोपपत्र दायर किया गया था और संबंधित अदालत ने इसका संज्ञान लिया था।

न्यायालय ने पुलिस को पीड़िता के परिवार को आरोपपत्र की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि आरोपपत्र की जांच के बाद याचिकाकर्ता यह बता सकता है कि क्या उसमें कोई खामी है और क्या विशेष जांच दल (एसआईटी) की आवश्यकता है।

बच्ची को 16 मार्च को उसके पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया था। जब बच्ची वापस नहीं लौटी, तो उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की और उसे बेहोश और खून से लथपथ पाया।

न्यायालय ने 10 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के ‘असंवेदनशील रवैये’ की कड़ी आलोचना की।

शीर्ष अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया था और अंततः सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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