शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रथ का उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया
शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रथ का उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया
(तस्वीर के साथ)
कोलकाता, सात मई (भाषा) भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ का बृहस्पतिवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले में उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां हजारों ग्रामीणों ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया।
भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मचारी 42 वर्षीय रथ के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर उनके गांव कुलुप में रखा गया ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें। शुभेंदु के भाई दिव्येंदु अधिकारी समेत कई भाजपा नेता वहां मौजूद थे।
इससे पहले, उत्तर 24 परगना जिले के बारासात अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम किया गया था। शुभेंदु अधिकारी पोस्टमार्टम के दौरान तीन घंटे से अधिक समय तक बारासात अस्पताल में रहे।
शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात उत्तर 24 परगना जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई। भाजपा ने इसे ‘‘लक्षित हत्या’’ करार दिया है। इस घटना के बाद तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इलाके में तनाव बढ़ गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने रात करीब साढ़े 10 बजे मध्यमग्राम के डोलतला के पास रथ के वाहन को रोका और नजदीक से गोली मारकर फरार हो गए।
जब रथ का शव चांदीपुर क्षेत्र के कुलुप गांव ले जाया गया, तो उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य बिलखने लगे तथा पड़ोसियों ने उन्हें सांत्वना दी।
रथ की मां ने कहा कि वह एक मां के दर्द को समझती हैं इसलिए वह दोषियों को मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की मांग करती हैं।
रथ की मां पूर्वी मेदिनीपुर में भाजपा की कार्यकर्ता भी हैं।
रथ के पैतृक घर के पास रहने वाली कमला ने बुधवार को ही गांव आए रथ की आखिरी यात्रा को याद किया, जब वह नंदीग्राम से भारी बहुमत से निर्वाचित होने पर धन्यवाद समारोह में शामिल होने के लिए शुभेंदु अधिकारी के साथ आए थे।
कमला ने कहा, ‘‘रथ की मां ने उनका पसंदीदा व्यंजन बनाया था। उन्होंने इस महीने के अंत में एक पारिवारिक शादी में शामिल होने का वादा भी किया था और हम सभी से मिलने का भी वादा किया था।’’
एक अन्य ग्रामीण बुद्धदेव मैती ने बताया कि बुधवार को अपने दौरे के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने लोगों को चुनाव के बाद किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति बार-बार आगाह किया था।
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश

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