माकपा के बागी नेता प्रतीकुर रहमान तृणमूल कांग्रेस में शामिल

माकपा के बागी नेता प्रतीकुर रहमान तृणमूल कांग्रेस में शामिल

माकपा के बागी नेता प्रतीकुर रहमान तृणमूल कांग्रेस में शामिल
Modified Date: February 21, 2026 / 08:29 pm IST
Published Date: February 21, 2026 8:29 pm IST

कोलकाता, 21 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बागी नेता प्रतीकुर रहमान शनिवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके तुरंत बाद माकपा ने रहमान को पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता और “प्रतिद्वंद्वी खेमे” से जुड़ने को लेकर पार्टी से निष्कासित कर दिया।

रहमान ने 16 फरवरी को माकपा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने डायरमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

रहमान ने बनर्जी के अमतला स्थित कार्यालय में संवाददाताओं से कहा कि वह माकपा में रहते हुए बहुत घुटन महसूस कर रहे थे।

रहमान ने 2024 का लोकसभा चुनाव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले रहमान के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपने “घटते जनाधार” से निपटने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फासीवाद से लड़ना चाहता हूं। मेरा मानना ​​है कि लोगों को बांटने की चाह रखने वाली हिंदुत्ववादी ताकतों से मिल रही चुनौतियों से निपटने की क्षमता केवल तृणमूल कांग्रेस में है।”

बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस में रहमान का स्वागत करते हुए कहा कि प्रतीकुर सिर्फ गरीबों और वंचितों के लिए काम करने की इच्छा रखते हैं और विधानसभा चुनाव के टिकट के लिए उनके और पार्टी के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है।

बनर्जी ने कहा, “मैं प्रतीकुर को लंबे समय से जानता हूं; उन्होंने 2024 में मेरे खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। लेकिन वह मार्क्सवादी पार्टी के उन युवा नेताओं में से हैं, जो गतिशील और सिद्धांतवादी हैं तथा देश के सामने मौजूद वास्तविक खतरे से लड़ने का दृढ़ संकल्प रखते हैं। हमारी लड़ाई भाजपा के खिलाफ है।”

तृणमूल सांसद ने हैरानी जताई कि केरल में माकपा नीत वाम मोर्चा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ही एसआईआर को “जल्दबाजी में लागू किए जाने” का प्रभावी ढंग से विरोध कर रही है और “उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे को उठाने तथा निर्वाचन आयोग को उनके निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करने में सक्षम है।”

बनर्जी ने कहा, “माकपा सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नजर आती है। क्या मैं पूछ सकता हूं कि किस विचारधारा ने माकपा के प्रदेश सचिव (मोहम्मद सलीम) को हुमायूं कबीर से मिलने की इजाजत दी, जबकि वे (माकपा) धर्म आधारित राजनीति नहीं करने का दावा करते हैं?”

तृणमूल कांग्रेस में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह सिद्धांतवादी और मेहनती युवा पीढ़ी को मौका देंगे। उन्होंने ऐसे ही कुछ युवाओं नेताओं के नाम भी लिए, जिनमें माकपा छोड़ तृणमूल में आए ऋतोब्रतो मुखर्जी, लोकसभा सदस्य सायोनी घोष और देबांग्शु भट्टाचार्य शामिल हैं।

बनर्जी ने कहा, “हम विभिन्न दलों के युवाओं से आह्वान करते हैं कि वे आएं और हमारे साथ जुड़कर गरीबों और आम जनता के लिए काम करें।”

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप


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