भर्ती घोटालों से बंगाल की बदनामी हुई, अगले बजट सत्र में नयी नीति पेश की जाएगी: शुभेंदु अधिकारी
भर्ती घोटालों से बंगाल की बदनामी हुई, अगले बजट सत्र में नयी नीति पेश की जाएगी: शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, 23 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए विभिन्न भर्ती घोटालों के कारण राज्य की बदनामी हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा के अगले बजट सत्र में नयी भर्ती नीति लाएगी।
अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान हुई इन अनियमितताओं के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था जिसके परिणामस्वरूप 26,000 स्कूली नौकरियां रद्द हुईं।
उन्होंने कहा इससे पश्चिम बंगाल की साख को गहरा नुकसान पहुंचा और राज्य को इस स्थिति से बाहर निकालने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल विधानसभा के अगले बजट सत्र में नयी भर्ती नीति बनाने के लिए एक विधेयक पेश किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छा है कि भर्ती परीक्षाओं में उपयोग की गई ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (ओएमआर) उत्तर पुस्तिका की प्रति (कार्बन कॉपी) परीक्षा के तुरंत बाद परीक्षार्थियों को दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि अब तक राज्य की भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट की प्रति परीक्षार्थियों को नहीं दी जाती थी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘यह बेहद खराब और दुर्भावनापूर्ण है। भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जाता था।’’
केंद्र सरकार द्वारा आयोजित रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए अधिकारी ने कहा कि शिक्षा और बौद्धिकता के उच्च मानकों के लिए पहचाने जाने वाले पश्चिम बंगाल की स्कूल भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटालों के कारण ‘‘बदनामी’’ हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें अपने पश्चिम बंगाल को इस स्थिति से बाहर निकालना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा केंद्र इस कदर बदनाम हो गए कि पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने राज्य में अपनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करना बंद कर दिया।’’
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के युवाओं को बिहार, असम और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में जाकर परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षात्कार को सबसे अधिक अंक देने की पश्चिम बंगाल सरकार की मौजूदा भर्ती प्रणाली ‘‘उचित नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि साक्षात्कार के न्यूनतम अंक होने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने राज्य भर्तियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण के ‘100 बिंदु रोस्टर’ की संवैधानिक बाध्यता का पालन नहीं किया।
‘100 बिंदु रोस्टर’ एक मानक प्रशासनिक ढांचा है जिसके तहत लगातार निकलने वाली 100 नौकरियों में आरक्षण का अनुपात तय किया जाता है ताकि संवैधानिक आरक्षण कानूनी सीमाओं के भीतर सही तरीके से लागू हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में संशोधन के जरिए लागू किए गए ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत आरक्षण सहित इन सभी प्रावधानों को पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती सरकार ने नजरअंदाज किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम भर्ती के लिए पारदर्शी लिखित परीक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता का उचित मूल्यांकन और अनिवार्य 100 बिंदु रोस्टर का क्रियान्वयन चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि साक्षात्कार में दिए जाने वाले अंकों का प्रतिशत घटाया जाए और भर्ती संस्थाओं की वेबसाइट पर अभ्यर्थियों के अंक प्रकाशित किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की भर्ती प्रक्रिया उसी तरह होगी, जैसी रेलवे और अर्धसैनिक बलों जैसी केंद्र सरकार की संस्थाओं में होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा व्यक्तिगत मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में उपयोग की गई ओएमआर शीट की एक प्रति संबंधित उम्मीदवारों को दी जानी चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि छह जून को पश्चिम बंगाल की सभी भर्ती संस्थाओं का एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने केंद्र सरकार के रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा प्रक्रिया को अपनाने का फैसला किया है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर करियर के सपने के साथ उन्हें पढ़ाते हैं, लेकिन तृणमूल सरकार के दौरान राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भर्तियों में हुई अनियमितताओं ने उनके सपने चकनाचूर कर दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार उन अन्य 20 राज्यों की तर्ज पर चलेगी, जहां भाजपा की ‘‘डबल इंजन’’ सरकारें हैं।
भाषा
खारी पवनेश
पवनेश

Facebook


