लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ का मार्ग प्रशस्त करने वाला नियमन प्रभावी

लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ का मार्ग प्रशस्त करने वाला नियमन प्रभावी

लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ का मार्ग प्रशस्त करने वाला नियमन प्रभावी
Modified Date: September 5, 2026 / 08:01 pm IST
Published Date: September 5, 2026 8:01 pm IST

लेह, पांच सितंबर (भाषा) लद्दाख में जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ के गठन से संबंधित नियमन शनिवार से प्रभावी हो गया। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इसे न्याय प्रदान करने की व्यवस्था को लोगों के करीब लाने की दिशा में एक ‘‘ऐतिहासिक कदम’’ बताया।

राष्ट्रपति ने 27 अगस्त, 2026 को इस नियमन को जारी किया था। इसमें प्रावधान किया गया था कि यह प्रशासक राजपत्र में अधिसूचना के जरिये निर्धारित तरीख पर प्रभावित होगा।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की पीठ) नियमन, 2026, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की एक पीठ को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्थापित करने का प्रावधान करता है, आज (शनिवार) से प्रभावी हो गया है।’’

उन्होंने कहा कि इससे पीठ की स्थापना और उसके संचालन की दिशा में आगे की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।

लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित होने से केंद्र शासित प्रदेश के लोगों, विशेषकर दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वालों को न्याय तक पहुंच में काफी सुविधा होने की उम्मीद है।

उपराज्यपाल ने कहा कि भौगोलिक रूप से विशाल और चुनौतीपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां दुर्गम भूभाग, लंबी दूरियां और प्रतिकूल मौसम की स्थिति क्षेत्र के बाहर स्थित संस्थानों तक पहुंच को बेहद कठिन बना सकती है।

सक्सेना ने कहा, ‘‘लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की पीठ न्याय को लोगों के करीब लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए इससे न्याय तक पहुंच में काफी सुधार होगा और न्यायिक व्यवस्था हमारे नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख में न्याय प्रदान करने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मैं भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।’’

भाषा अमित धीरज

धीरज


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