नॉर्वे, भारत के बीच संबंधों के मुख्य आधार है पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई: राजदूत

नॉर्वे, भारत के बीच संबंधों के मुख्य आधार है पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई: राजदूत

नॉर्वे, भारत के बीच संबंधों के मुख्य आधार है पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई: राजदूत
Modified Date: February 26, 2026 / 04:58 pm IST
Published Date: February 26, 2026 4:58 pm IST

(कोमल शर्मा)

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) भारत में नॉर्वे की राजदूत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई दोनो देशों के बीच संबंधों की रणनीति के प्रमुख स्तंभ बने हुए हैं।

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने यहां विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2026 में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि विकासशील देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निरंतर वित्तीय एवं तकनीकी सहायता के माध्यम से प्रकृति-आधारित समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “नॉर्वे प्रकृति-आधारित समाधानों का प्रबल समर्थक है और हम इन समाधानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के लिए तत्पर हैं। हम दो प्रमुख क्षेत्रों वन और महासागर पर काम कर रहे हैं ।”

राजदूत ने व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय भारत के साथ नॉर्वे की सहयोग रणनीति के प्रमुख स्तंभ बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, “भारत के साथ हमारे सहयोग के चार-पांच कारणों में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से लड़ना शामिल है। यह हमारे सहयोग का एक महत्वपूर्ण घटक बना रहेगा।”

मे-एलिन स्टेनर ने वैश्विक वन संरक्षण प्रयासों का जिक्र करते हुए हाल ही में स्थापित ‘ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी’ का उल्लेख किया, जिसमें नॉर्वे ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हम वर्षावनों के संरक्षण का समर्थन करना जारी रखेंगे क्योंकि वे विश्व की जलवायु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”

राजदूत ने नॉर्वे को ‘भारत की तरह एक महासागरीय राष्ट्र’ बताया और कहा कि दोनों देश समुद्री संरक्षण व समुद्री अर्थव्यवस्था की योजनाओं पर मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे पास समुद्री अर्थव्यवस्था पर एक कार्य बल है और भारत के साथ महासागरों को लेकर समग्र सहयोग है। हम महासागरों के संरक्षण और प्रकृति के लिए बेहतर समाधान खोजने तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं।”

भाषा जितेंद्र माधव

माधव


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