नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) सरकार ने राज्यसभा को बताया है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजनाओं पर किये गए अध्ययनों में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और स्थिरता संतोषजनक पाई गई है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बुधवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि मिशन शक्ति के अंतर्गत ‘वन-स्टॉप सेंटर’ हिंसा प्रभावित और संकट का सामना कर रहीं महिलाओं को निजी और सार्वजनिक, दोनों स्थानों पर एक ही छत के नीचे एकीकृत और तत्काल सहायता प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करती है। वर्तमान में देश में 926 ‘वन स्टॉप सेंटर’ कार्यरत हैं।
मंत्रालय की योजनाओं, जिनमें मिशन शक्ति और उससे संबंधित ‘वन स्टॉप सेंटर’ से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं, का दो बार तृतीय-पक्ष द्वारा मूल्यांकन 2020 में और फिर 2025 में नीति आयोग के माध्यम से किया गया था।
मंत्री ने कहा, ‘‘अध्ययनों में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और स्थिरता संतोषजनक पाई गई है।’’
इससे पहले, पीटीआई ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के एक आदेश से संबंधित खबर जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि महिला सुरक्षा योजनाओं पर नीति आयोग द्वारा तैयार की गई तृतीय-पक्ष मूल्यांकन रिपोर्ट, जिसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित ‘वन स्टॉप सेंटर’ भी शामिल हैं, को लोगों के बीच रखा जाना चाहिए।
सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने एक आरटीआई अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ये रिपोर्ट, जो ऐसी योजनाओं के कार्यान्वयन, दक्षता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करती हैं, संस्थागत रूप से स्वतंत्र और साक्ष्य-आधारित आकलन हैं जिनका उद्देश्य नीति सुधार और बेहतर शासन है।
सीआईसी ने मंत्रालय के इस रुख पर कि आंतरिक फाइल नोटिंग के लगभग 1,870 पृष्ठों को उपलब्ध कराया जाना सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत ‘‘सार्वजनिक प्राधिकरण के संसाधनों का अनुचित रूप से दुरुपयोग’’ होगा, मूल्यांकन रिपोर्ट का तत्परता से खुलासा किये जाने पर टिप्पणियां कीं।
आदेश में कहा गया है कि ‘‘पारदर्शिता और जन जागरूकता के हित में, तीसरे पक्ष की मूल्यांकन रिपोर्ट, विशेष रूप से सरकारी खजाने से वित्त पोषित महिला सुरक्षा और कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन और प्रभावशीलता का आकलन करने वाली रिपोर्ट, सार्वजनिक की जानी चाहिए।’’
आयोग ने मंत्रालय को सलाह दी कि इस तरह के खुलासे से सार्वजनिक चर्चा को सुगम बनाने, जवाबदेही बढ़ाने और शासन व्यवस्था में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
भाषा सुभाष नरेश
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