जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया, कश्मीर मुद्दे पर पांच प्रधानमंत्रियों से मिला: शब्बीर शाह

जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया, कश्मीर मुद्दे पर पांच प्रधानमंत्रियों से मिला: शब्बीर शाह

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 08:49 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 08:49 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) आतंकवादी वित्त पोषण मामले में आरोपी कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह कश्मीर मुद्दे पर भारत के पांच प्रधानमंत्रियों से मिल चुके हैं और उनके भाषण मुख्यत: जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

शाह की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को उनके कुछ भाषण और मामले से जुड़े अन्य प्रासंगिक तथ्य पेश करने का निर्देश दिया।

शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेज ने पीठ से कहा, “मेरे मुवक्किल ने कभी पत्थरबाजी नहीं की, न ही किसी को उकसाया। उन्होंने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत के पांच प्रधानमंत्रियों के साथ बैठक की। हमारे पास इन प्रधानमंत्रियों के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें हैं। उन्होंने (पांचों प्रधानमंत्रियों ने) मेरे मुवक्किल से पूछा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए क्या किया जा सकता है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे जानते थे कि वह (शाह) आतंकवादी नहीं थे।”

गोंजाल्वेज ने कहा कि घाटी के लोग शाह से इसलिए प्यार नहीं करते कि वह कौन हैं, बल्कि इसलिए कि वह क्या कहते हैं, क्योंकि उनके शब्द लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने कहा, “हां, शाह के शब्द थोड़े असहज थे, लेकिन इतने भी नहीं कि पांच प्रधानमंत्रियों ने उन्हें फोन किया। उन्होंने (पांचों प्रधानमंत्रियों ने) बहुत ही विनम्रता से पूछा कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए क्या किया जा सकता है। मेरे मुवक्किल ने भी उन्हें बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया कि क्या किया जा सकता है। शाह को जनता का प्यार हासिल है, क्योंकि वह घाटी के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

गोंजालवेज ने कहा कि शाह कई बार गए और उन्होंने कुल 39 साल सलाखों के पीछे गुजारे।

पीठ ने इस बात को रेखांकित किया कि शाह आतंकी वित्तपोषण मामले के सिलसिले में 2019 से जेल में हैं और अन्य मामलों से जुड़े तथ्यों को इस मामले में शामिल नहीं किया जा सकता है।

गोंजालवेज ने दलील दी कि 1991 से दर्ज सभी अन्य प्राथमिकी में शाह पर ज्यादातर उनके कथित “घृणास्पद भाषणों” के लिए आरोप लगाए गए थे, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने सुरक्षा बलों पर हमला करने या सरकारी कामकाज में खलल डालने के सिलसिले में एक भी बयान नहीं दिया और सिर्फ कश्मीर के लोगों की आजादी के बारे में बात की।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “आजादी से शाह का मतलब यह कभी नहीं था कि वह पाकिस्तान के साथ जाना चाहते हैं। शाह कश्मीर में हिंसा के दौर में जान गंवाने वाले लोगों से मिलने जाते थे, लेकिन वह उनके साथ बातचीत में क्षेत्र की स्थिति पर अफसोस जताते थे, जो कश्मीर के एक नेता के रूप में आम बात है।”

एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि तिहाड़ जेल और कश्मीर के महानिदेशक (जेल) की रिपोर्ट से शाह के 39 साल सलाखों के पीछे बिताने के दावे की पुष्टि नहीं होती है।

उन्होंने कहा कि आतंकी वित्त पोषण मामले में शाह की ओर से जेल में काटी गई अवधि लगभग पांच साल दो महीने, जबकि सलाखों के पीछे गुजारी गई कुल अवधि आठ साल के आसपास हो सकती है।

पीठ ने मामले के तथ्यों को ठीक तरह से पेश न करने के लिए एनआईए को फटकार लगाई। उसने कहा कि एनआईए को शाह की छह साल से अधिक की हिरासत अवधि को उचित ठहराना चाहिए।

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा, “प्रथम दृष्टया हमें ऐसे कृत्यों में लिप्त लोगों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, लेकिन उनकी हिरासत को उचित ठहराने के लिए तथ्य मौजूद होने चाहिए। वे कौन से तथ्य हैं, जो छह साल की अवधि से आगे उनकी हिरासत को उचित ठहराते हैं? हम उपलब्ध तथ्यों से नजरें नहीं फेर सकते।”

लूथरा ने तथ्यों से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए कुछ समय मांगा। उन्होंने दलील दी कि वह एनआईए का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस के पास हो सकते हैं।

न्यायमूर्ति नाथ ने गोंजालवेज से पूछा कि शाह किन गणमान्य व्यक्तियों से मिले थे। इस पर उन्होंने कहा कि संबंधित तस्वीरें केस फाइल के साथ संलग्न हैं।

हालांकि, गोंजालवेज ने कुछ गणमान्य व्यक्तियों के नाम लिए, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, आईके गुजराल, चंद्र शेखर और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी व केसी पंत शामिल हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि शाह 74 साल के हैं और उन्हें जमानत देने के लिए यह शर्त रखी जा सकती है कि वह कश्मीर में अपने घर और बगीचे तक ही सीमित रहेंगे।

उन्होंने दलील दी, “कश्मीर में भाषणों का दौर खत्म हो चुका है।”

पीठ ने कहा कि अगर सुनवाई 10 फरवरी तक पूरी नहीं होती है, तो शीर्ष अदालत उस दिन राहत पर विचार कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल चार सितंबर को शाह को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने एनआईए को नोटिस जारी कर उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली शाह की याचिका पर जवाब तलब किया था।

उच्च न्यायालय ने शाह की जमानत अर्जी यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि उसके इसी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।

एनआईए ने शाह को आतंकी वित्त पोषण मामले में चार जून 2019 को गिरफ्तार किया था।

केंद्रीय एजेंसी ने 2017 में पत्थरबाजी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और केंद्र सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए धन जुटाने की साजिश रचने के आरोप में 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

शाह पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाने का आरोप लगाया गया था। उन पर आम जनता को जम्मू-कश्मीर की आजादी के समर्थन में नारे लगाने के लिए उकसाने, मारे गए आतंकवादियों या उग्रवादियों के परिवारों को “शहीद” बताकर श्रद्धांजलि देने, हवाला लेनदेन के माध्यम से धन प्राप्त करने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार व्यापार के जरिये धन जुटाने के आरोप लगे थे, जिसका कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में विध्वंसक और उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

भाषा पारुल नरेश

नरेश