रेरा दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है : उच्चतम न्यायालय

रेरा दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है : उच्चतम न्यायालय

रेरा दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है : उच्चतम न्यायालय
Modified Date: February 12, 2026 / 06:01 pm IST
Published Date: February 12, 2026 6:01 pm IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सभी राज्यों के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के गठन पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है क्योंकि यह संस्था दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के लिए रेरा बनाया गया था, वे ‘‘पूरी तरह से निराश और हताश’’ हैं।

पीठ ने जोर देकर कहा कि अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी।

पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को रेरा के कार्यालय को अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं।

हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य द्वारा दायर याचिका पर पीठ ने नोटिस जारी किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जो राज्य के रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से संबंधित था।

उच्च न्यायालय ने इससे पहले रेरा कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया।

उच्चतम न्यायालय ने 30 दिसंबर के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘दागी बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह संस्था (रेरा) कुछ नहीं कर रही है। बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है …अब समय आ गया है कि सभी राज्य इस प्राधिकरण के गठन पर ही पुनर्विचार करें।’’

राज्य सरकार ने अधिवक्ता सुगंधा आनंद के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि हिमाचल प्रदेश रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने के लिए लिया गया था, और यह पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों पर आधारित था।

प्रतिवादी की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि प्राधिकरण जिन परियोजनाओं से संबंधित मामलों को देखता है, उनमें से 90 प्रतिशत शिमला, सोलन, परवानू और सिरमौर में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं।

उन्होंने कहा कि रेरा के समक्ष लंबित शिकायतों में से लगभग 92 प्रतिशत इन्हीं जिलों से हैं, और धर्मशाला में केवल 20 परियोजनाएं हैं।

भाषा

शफीक प्रशांत

प्रशांत


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