सेवानिवृत्त अधिकारियों ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के सेवा विस्तार का स्वागत किया

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सेवानिवृत्त अधिकारियों ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के सेवा विस्तार का स्वागत किया

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 08:22 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 08:22 PM IST

(जीवन प्रकाश शर्मा)

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में सतीश कुमार को एक और सेवा विस्तार देने के सरकार के फैसले का वरिष्ठ सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों ने स्वागत किया है।

हालांकि, उनमें से कुछ ने कहा कि सरकार को एक बार में एक वर्ष के बजाय लंबी अवधि के लिए सेवा विस्तार देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि लंबे कार्यकाल से अधिक निश्चितता आएगी, दीर्घकालिक योजना बनाने में सुविधा होगी और निरंतरता सुनिश्चित होगी।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सोमवार को कुमार के कार्यकाल में एक वर्ष का विस्तार देने की घोषणा की, जो 31 अगस्त, 2026 को समाप्त होने वाला था।

आधिकारिक आदेश में कहा गया है, ‘‘मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने सतीश कुमार, भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (आईआरएमएस) (1986) (सेवानिवृत्त) के रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ के तौर पर कार्यकाल को एक साल और बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह विस्तार 01 सितंबर, 2026 से लागू होगा और अनुबंध के आधार पर दोबारा नियुक्ति के तहत मौजूदा शर्तों पर या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) प्रभावी रहेगा। इसके लिए ‘भारतीय रेल (वरिष्ठ पदों पर चयन) नियम, 2025’ में छूट दी गई है।’’

कुमार को एक सितंबर, 2024 को रेलवे बोर्ड का अध्यक्ष एवं सीईओ नियुक्त किया गया था। वह 31 दिसंबर 2024 को अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र (60 वर्ष) पूरी कर चुके थे और उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार ने उनके मूल नियुक्ति आदेश की शर्तों के तहत उन्हें उसी पद पर एक जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2025 तक अनुबंध के आधार पर पुनर्नियुक्त किया।

उनके अनुबंधित कार्यकाल की समाप्ति से पहले सरकार ने 27 अगस्त 2025 को जारी एक आदेश के माध्यम से उनकी पुनर्नियुक्ति को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया जो एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक प्रभावी है।

अब 27 जुलाई 2026 को जारी नवीनतम आदेश के तहत कुमार को लगातार दूसरी बार एक वर्ष का सेवा विस्तार मिला है, जिससे वह एक सितंबर 2026 से 31 अगस्त 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे।

कुमार के नवीनतम सेवा विस्तार पर सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों और विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

कुछ अधिकारियों का कहना था कि कार्यकाल विस्तार देना पूरी तरह सरकार के अधिकार क्षेत्र में है लेकिन बार-बार एक-एक वर्ष का विस्तार देना एक तदर्थ दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उनका तर्क थ कि यदि सरकार को किसी पदाधिकारी पर भरोसा है तो उसे एक बार में ही लंबी अवधि का सेवा विस्तार देना चाहिए।

रेल पहिया कारखाना, बेला (सारण, बिहार) के एक पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी शुभ्रांशु ने कहा, ‘‘अगर किसी व्यक्ति को शुरू में लंबी अवधि के लिए नियुक्त किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उसी समय विस्तार का प्रावधान कर दिया जाए तो इससे आगे के कार्यकाल विस्तार को लेकर अनिश्चितता समाप्त हो जाएगी और पदाधिकारी को बेहतर योजना बनाने तथा प्रभावी ढंग से काम करने में मदद मिलेगी। लंबा कार्यकाल किसी व्यक्ति की क्षमता और नेतृत्व पर सरकार के विश्वास को भी दर्शाता है।’’

हालांकि, सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक अन्य वर्ग ने बार-बार दिए जा रहे सेवा विस्तार के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते समय अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

रेलवे के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सरकार के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन लगातार दिए जा रहे सेवा विस्तार भारतीय रेलवे में उत्तराधिकार योजना को लेकर सवाल खड़े करते हैं। अगर सेवारत अधिकारी भी इस भूमिका को समान रूप से निभा सकते हैं तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बार-बार सेवा विस्तार की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।’’

भाषा सुरभि नरेश

नरेश