रासुका के तहत मेरी हिरासत को रद्द किया जाना सभी के लिए लाभदायक : वांगचुक

रासुका के तहत मेरी हिरासत को रद्द किया जाना सभी के लिए लाभदायक : वांगचुक

रासुका के तहत मेरी हिरासत को रद्द किया जाना सभी के लिए लाभदायक : वांगचुक
Modified Date: March 17, 2026 / 06:13 pm IST
Published Date: March 17, 2026 6:13 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद पहली सार्वजनिक टिप्पणी में मंगलवार को कहा कि रासुका के तहत उनकी हिरासत को रद्द करना ‘‘सभी के लिए फायदेमंद’’ है और केंद्र ने लद्दाख के लोगों के साथ सार्थक संवाद के लिए विश्वास कायम करने की दिशा में पहल की है।

वांगचुक ने पत्नी और एचआईएएल की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो के साथ यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लद्दाख में विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य रचनात्मक संवाद प्रक्रिया शुरू करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अदालत में जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन सिर्फ जीत ही काफी नहीं थी। मैं सभी पक्षों के लिए फायदेमंद स्थिति चाहता हूं।’’

वांगचुक ने सरकार की पहल को ‘‘विश्वास कायम करने और सार्थक, रचनात्मक संवाद को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम’’ करार दिया।

जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘उन्होंने रचनात्मक और सार्थक संवाद का प्रस्ताव रखा है। यही हम चाहते थे, और इसके लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ा, दिल्ली तक पैदल चलना पड़ा, अनशन पर बैठना पड़ा। लद्दाख में सभी आंदोलन संवाद प्रक्रिया शुरू करने के लिए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर लोग हथियार उठाते हैं और सरकार बातचीत की अपील करती है। यहां लोग सरकार से बातचीत शुरू करने का आग्रह कर रहे हैं।’’

वांगचुक से अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह लद्दाख की यात्रा करेंगे और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केएडी) के नेताओं से परामर्श करेंगे, जो पिछले पांच वर्षों से राज्य का दर्जा और लद्दाख को छठी अनुसूची का विस्तार देने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

नए सिरे से आंदोलन शुरू करने के सवाल पर जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा कहा है कि मैं भूख हड़ताल पर नहीं बैठना चाहता। मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, अब जबकि सरकार ने पहल की है, हमें उम्मीद है कि इससे एक अच्छा उदाहरण पेश होगा।’’

वांगचुक (59) को पिछले साल 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्हें लद्दाख में आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हिरासत में लिया गया था। उक्त हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी।

केंद्र सरकार द्वारा वांगचुक की नजरबंदी को तत्काल प्रभाव से रद्द किये जाने के बाद उन्हें शनिवार को जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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