कृष्णा-गोदावरी बेसिन विवाद में मध्यस्थता के लिए केंद्र को पत्र लिखेंगे: : आरआईएल ने न्यायालय में कहा
कृष्णा-गोदावरी बेसिन विवाद में मध्यस्थता के लिए केंद्र को पत्र लिखेंगे: : आरआईएल ने न्यायालय में कहा
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और दो विदेशी कंपनियों ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि वे कृष्णा-गोदावरी (केजी) नदी घाटी गैस विवाद में मध्यस्थता के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगी।
यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष रखा गया।
कंपनियों की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया, ‘‘सभी याचिकाकर्ता आज भारत सरकार को मध्यस्थता के लिए पत्र लिखेंगे… हम निवेदन कर रहे हैं कि पहले मध्यस्थता का प्रयास किया जाए।’’
वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि मध्यस्थता का परिणाम आने तक मामले की सुनवाई रोक दी जाए।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत से आज सूचीबद्ध मामले में सुनवाई जारी रखने का अनुरोध किया।
शीर्ष न्यायिक अधिकारी ने कहा, ‘‘यदि इस बीच कुछ होता है, तो हम अदालत को सूचित करेंगे।’’
पीठ ने सुनवाई रोकने से इनकार करते हुए कहा कि पक्षकार मध्यस्थता के परिणाम से उसे अवगत करा सकते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप मध्यस्थता में सफल होते हैं तो बहुत अच्छी बात है। तब हम मामले का निपटारा कर देंगे।’’
शीर्ष अदालत ने 19 मई को आरआईएल और उसकी साझेदार कंपनियों की उन अपील पर अंतिम सुनवाई शुरू की, जिनमें केंद्र के साथ उनके कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद में आए मध्यस्थता निर्णय को निरस्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
आरआईएल के साथ बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड ने उच्च न्यायालय के 14 फरवरी, 2025 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें एकल पीठ द्वारा 2023 में इन कंपनियों के पक्ष में मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखने के फैसले को रद्द कर दिया गया था।
इससे पहले, जुलाई 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने आरआईएल और उसके साझेदारों के खिलाफ केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज करते हुए संबंधित कंपनियों को 83 लाख डॉलर का मुआवजा देने का फैसला सुनाया था।
भाषा खारी वैभव
वैभव

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