नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में 2026 के शुरुआती छह महीनों के दौरान सड़क हादसों में हर 15 घंटे में एक पैदल यात्री की जान गई जबकि इसी अवधि में जख्मी होने वाले हर तीन में से एक व्यक्ति पैदल यात्री था। दिल्ली यातायात पुलिस ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर आवेदन के जवाब में यह जानकारी उपलब्ध कराई है।
जवाब के मुताबिक, पैदल यात्रियों के लिए सबसे सुरक्षित इलाका नयी दिल्ली का क्षेत्र है जहां छह महीने के दौरान सिर्फ एक पैदल यात्री की मौत हुई।
यातायात पुलिस ने ‘पीटीआई-भाषा’ की ओर से दायर आवेदन के जबाव में बताया कि जनवरी से 30 जून 2026 के बीच सड़क हादसों में कुल 807 लोगों की मौत हुई जिनमें 288 पैदल यात्री थे।
पुलिस ने यह भी बताया कि इसी अवधि के दौरान 3031 लोग जख्मी हुए हैं जिनमें 934 पैदल यात्री थे।
यातायात पुलिस के जनवरी 2026 के ‘न्यूजलेटर’ के मुताबिक, 2025 में तकरीबन 649 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई और 1738 लोग जख्मी हुए, जिनमें काफी संख्या पैदल यात्रियों की थी।
इस साल के शुरुआती छह महीनों में ही सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या पिछले पूरे साल में जान गंवाने वालों के मुकाबले अबतक 24.4 प्रतिशत बढ़ चुकी है, जबकि घायलों की संख्या में 74.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इस साल के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में साल के शुरुआती छह महीनों के दौरान सड़क हादसों में जान गंवाने वाले हर तीन में से एक व्यक्ति पैदल यात्री था जबकि हर साढ़े चार घंटे में एक पैदल यात्री सड़क हादसों में जख्मी हुआ।
शीर्ष अदालत ने इस साल जून में एक अहम फैसले में कहा कि तय फुटपाथ पर पैदल चलने का नागरिक का मौलिक अधिकार सर्वोपरि है और इसे मोटर वाहनों की आवाजाही के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी।
न्यायालय की यह टिप्पणी मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में आई, जिसमें एक पिता ने अपने पांच साल के बेटे को स्कूल ले जाते समय खो दिया था।
पुलिस के जवाब के मुताबिक, सबसे कम मौतें नयी दिल्ली जिले में हुई। इस जिले में छह महीने में 20 लोगों की जान गई जिनमें सिर्फ एक पैदल यात्री था जबकि 111 लोग जख्मी हुए जिनमें सिर्फ चार पैदल यात्री थे।
यातायात पुलिस ने ‘पीटीआई-भाषा’ के एक अन्य आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया कि उसने साल के शुरुआती छह महीनों के दौरान 19.12 लाख लोगों को सड़क सुरक्षा के नियमों को लेकर जागरुक किया।
जवाब के मुताबिक, सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ ने हर कार्यक्रम के दौरान लोगों को ‘स्टॉप लाइन’ से पहले गाड़ी रोकना, सड़क पार करने के सुरक्षित तरीकों जैसे ‘जेब्रा कॉसिंग’ का इस्तेमाल करना या जहां ‘जेब्रा कॉसिंग’ न हो, वहां सबवे और फुटओवर ब्रिज का इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी दी। साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर भी लोगों को जागरुक किया गया।
हालांकि सड़क सुरक्षा संगठन ‘ट्रैक्स’ के अध्यक्ष अनुराग कुलश्रेष्ठ ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में दावा किया कि दिल्ली में 98 फीसदी ‘जेब्रा कॉसिंग’ से पहले स्टॉप लाइन नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि ‘स्टॉप लाइन’ का मतलब होता है कि जेब्रा क्रॉसिंग से दो तीन मीटर पहले गाड़ियों को रोका जाए ताकि पैदल यात्री आराम से सड़क पार कर लें।
कुलश्रेष्ठ ने फुटपाथ और उसके रखरखाव पर भी सवाल उठाए और कहा कि फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर और ऊंचाई सड़क से छह इंच होनी चाहिए ।
उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली इलाके को छोड़ दें तो राष्ट्रीय राजधानी के अधिकतर इलाकों में एक मीटर, आधा मीटर के फुटपाथ हैं।
उन्होंने कहा, “ जो फुटपाथ हैं भी, उनमें से ज्यादातर की हालत ठीक नहीं है। कहीं खड्डे हुए हैं, तो कहीं टाइल टूटी हुई हैं तो कहीं अतिक्रमण है। इसकी वजह से पैदल यात्री सड़क पर चलते हैं” और इस वजह से वे गाड़ियों की चपेट में आते हैं।
कुलश्रेष्ठ ने कहा कि दिल्ली में सड़क हादसों में पैदल यात्री और दो पहिया वाहन सवारों की मौत ज्यादा होती हैं। उनके मुताबिक, फुटपाथ न होने या उनपर अतिक्रमण होने से पैदल यात्रियों के गाड़ियों के चपेट में आने और उन्हें बचाने की कोशिश में गाड़ियों की आपस में टक्कर होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
उन्होंने दो पहिया वाहन सवारों की मौत को लेकर कहा, “अच्छी गुणवत्ता के हेलमेट नहीं लगाना इसका कारण है। दिल्ली में ज्यादातर लोग खासकर दो पहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले ‘टोपी’ वाला हेलमेट लगाते हैं, जो दुर्घटना से बचाने में उपयोगी नहीं है और ऐसे हेलमेट लगाना भी कानूनन सही नहीं है। दो पहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने पर मौत का एक बड़ा यही कारण है।”
भाषा नोमान मनीषा
मनीषा