Romeo Juliet Clause: टीनएज कपल्स के लिए खुशखबरी? सहमति वाला प्यार अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’, देखें

Romeo Juliet Clause: टीनएज कपल्स के लिए खुशखबरी? सहमति वाला प्यार अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’, देखें

Romeo Juliet Clause: टीनएज कपल्स के लिए खुशखबरी? सहमति वाला प्यार अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’, देखें

Romeo Juliet Clause/Image Source: IBC24

Modified Date: January 11, 2026 / 04:32 pm IST
Published Date: January 11, 2026 4:31 pm IST
HIGHLIGHTS
  • प्यार अपराध नहीं
  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत
  • टीनएज लवर्स को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली: Romeo Juliet Clause:  सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए POCSO अधिनियम के कथित बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक पवित्र और नेक उद्देश्य वाला अधिनियम है, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल बदले की भावना, पारिवारिक दबाव और निजी दुश्मनी के हथियार के रूप में किया जा रहा है। कोर्ट ने चेताया कि ऐसे दुरुपयोग से कानून की मूल भावना ही प्रभावित हो रही है।

किशोरों के सहमति वाले रिश्ते बन रहे हैं अपराध (Romeo Juliet Clause News)

Romeo Juliet Clause:  न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने खास तौर पर उन मामलों पर चिंता जताई, जहां किशोरों के बीच सहमति से बने रिश्तों को भी POCSO की कठोर आपराधिक धाराओं के तहत लाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि कई बार परिवार, युवाओं के आपसी रिश्तों से असहमत होकर POCSO कानून का सहारा लेते हैं, जिससे वास्तविक अपराध और सहमति वाले संबंधों के बीच का फर्क मिटता जा रहा है।

केंद्र सरकार को ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ पर विचार का सुझाव (Supreme Court POCSO Observation)

Romeo Juliet Clause:  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस गंभीर समस्या पर विचार करने को कहा है और सुझाव दिया है कि POCSO अधिनियम में ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ जैसे प्रावधान को शामिल किया जाए। इस क्लॉज का उद्देश्य उन वास्तविक किशोर जोड़ों को राहत देना होगा, जहां दोनों पक्ष सहमति से रिश्ते में हों और उम्र में बहुत कम अंतर हो, ताकि उन्हें अनावश्यक आपराधिक मुकदमों का सामना न करना पड़े। शीर्ष अदालत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अदालत का काम केवल आरोपी की रिहाई या निरोध पर फैसला करना है, न कि जांच प्रक्रिया में बदलाव करना या सामान्य दिशानिर्देश जारी करना। ऐसा करना संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों का अनुचित मिश्रण है।

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लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।