दिल्ली-एनसीआर के छह ताप विद्युत संयंत्रों पर 61 करोड़ रुपये का जुर्माना

दिल्ली-एनसीआर के छह ताप विद्युत संयंत्रों पर 61 करोड़ रुपये का जुर्माना

दिल्ली-एनसीआर के छह ताप विद्युत संयंत्रों पर 61 करोड़ रुपये का जुर्माना
Modified Date: April 8, 2026 / 07:10 pm IST
Published Date: April 8, 2026 7:10 pm IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में संचालित छह ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) पर जैव-उत्सर्जन मानदंडों का पालन न करने के लिए 61 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पर्यावरण (ताप विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के तहत सभी कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के लिए कोयले के साथ जैव ईंधन या ‘ब्रिकेट’ का पांच प्रतिशत मिश्रण अनिवार्य किया गया है। साथ ही, पर्यावरणीय जुर्माना लगाए जाने से बचने के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूनतम तीन प्रतिशत सह-दहन का प्रावधान किया गया है।

फसल अवशेषों के प्रबंधन को बढ़ावा देने, पराली जलाने के मामलों को कम करने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) तथा आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाने के उद्देश्य से इसे अधिसूचित किया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘2024-25 की अवधि के लिए अनुपालन की समीक्षा के दौरान, छह ताप विद्युत संयंत्र नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। इसलिए सीएक्यूएम, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), ताप विद्युत संयंत्रों में कृषि अवशेषों के उपयोग पर सतत कृषि मिशन (समर्थ) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया गया।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति का गठन फसल अवशेषों का इस्तेमाल न करने के कारण लगाए गए पर्यावरणीय जुर्माने में छूट की मांग करने वाले टीपीपी द्वारा पेश अभ्यावेदनों की समीक्षा और उन पर मामले-दर-मामले आधार पर विचार करने के लिए किया गया था। समिति ने प्रदर्शन डेटा, अनुपालन स्थिति, लिखित दलीलों और टीपीपी द्वारा बताए गए कारणों की जांच की और संबंधित संयंत्रों को सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया।’’

अधिकारी के मुताबिक, गैर-अनुपालन वाले इन छह ताप विद्युत संयंत्रों पर कुल मिलाकर लगभग 61.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आयोग ने संबंधित टीपीपी को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित पर्यावरणीय जुर्माने को 15 अप्रैल तक जमा कर दें और आयोग के समक्ष इसका प्रमाण पेश करें।’’

भाषा आशीष पारुल

पारुल


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