नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद को गिराए जाने की मंगलवार को निंदा की और कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता तथा न्याय के मूल सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
बोर्ड ने मस्जिद गिराए जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष कानूनी जांच तथा इसके पीछे के कानूनी आधार और आदेशों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किए जाने की मांग की।
उसने उम्मीद जताई कि मस्जिद प्रबंधन उच्च अदालतों का रुख करेगा और अदालतें इस मामले के कानूनी एवं संवैधानिक पहलुओं की गहन जांच करेंगी।
आयोग का कहना है कि वह मस्जिद प्रबंधन को हरसंभव कानूनी और नैतिक समर्थन देगा।
बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यदि मस्जिद प्रबंधन को उच्च अदालत का रुख करने का कानूनी अधिकार था, तो उसे प्रभावी तरीके से कानूनी उपाय अपनाने का अवसर दिए बिना मस्जिद ढहा देना न्याय और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि भले ही सरकार भूमि पर उसके स्वामित्व का दावा करती हो, लेकिन वह कानून के शासन, निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से बंधी है।
इलियास ने कहा, ‘‘यह दावा कि भूमि सरकार की है, राज्य को कानून से ऊपर जाकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं देता। संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 क्रमशः समानता, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘विध्वंस के बाद मलबे के नीचे करीब 20 फुट गहरा एक प्राचीन कुआं मिला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने स्थल का निरीक्षण कर नमूने एकत्र किए हैं। ऐसे में मस्जिद के ऐतिहासिक दर्जे, सरकारी अभिलेखों और भूमि के स्वामित्व की निष्पक्ष जांच जरूरी है।’’
इलियास ने मस्जिद की ऐतिहासिक स्थिति, भूमि अभिलेखों और वक्फ से संबंधित सभी दस्तावेजों की व्यापक जांच की भी मांग की।
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