Samvida Karmi Niyamitikaran News: संविदा कर्मचारियों को मिला नियमितीकरण का तोहफा, सरकार ने नियम में किया संशोधन, लंबी लड़ाई के के बाद आखिरकार मिली जीत

संविदा कर्मचारियों मिला नियमितीकरण का तोहफा, Samvida Karmi Niyamimitikaran News: Government amended the rules for regularization

Samvida Karmi Niyamitikaran News: संविदा कर्मचारियों को मिला नियमितीकरण का तोहफा, सरकार ने नियम में किया संशोधन, लंबी लड़ाई के के बाद आखिरकार मिली जीत

Samvida Karmi Niyamimitikaran News. Image Source- IBC24

Modified Date: December 7, 2025 / 05:41 pm IST
Published Date: December 7, 2025 5:33 pm IST

देहरादूनः Samvida Karmi Niyamimitikaran News उत्तराखंड में लंबे समय से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को विनियमितीकरण संशोधन नियमावली 2025 की अधिसूचना जारी की। इसके तहत 10 साल सेवा पूरी करने वाले दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक कर्मचारी नियमित किए जाएंगे।

Samvida Karmi Niyamimitikaran News प्रदेश में नियमितीकरण की मांग वर्षों से चल रही थी। 2013 में पहली नियमावली आई थी और 2018 में इसका संशोधन किया गया था, लेकिन कर्मचारियों का इंतजार अभी तक जारी था। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने नियमावली के संशोधन को मंजूरी दी और शुक्रवार को सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने इसे औपचारिक रूप से अधिसूचित किया।

ये कर्मचारी होंगे पात्र  Samvida Karmi Niyamitikaran News

नई नियमावली के अनुसार, जिन कर्मचारियों ने 4 दिसंबर 2018 तक अपने पद या समकक्ष पद पर निरंतर 10 वर्ष सेवा पूरी कर ली है और अन्य शर्तें पूरी होती हैं, वे नियमितीकरण के पात्र होंगे। इससे पहले यह अवधि 5 वर्ष थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है। सरकार का यह कदम प्रदेश के हजारों कर्मचारियों के लिए राहत और लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान माना जा रहा है।

पहले थी ये व्यवस्था

Samvida Karmi Niyamitikaran News वहीं संशोधन से पूर्व यह व्यवस्था थी कि नियमावली में उल्लिखित अन्य शर्तें पूर्ण करने पर दैनिक वेतन, कार्य प्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप से नियुक्त वे कार्मिक विनियमितीकरण हेतु पात्र थे, जिन्होंने वर्ष 2013 की नियमावली के प्रख्यापन की तिथि को इस रूप में कम से कम पांच वर्ष की निरन्तर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूर्ण कर ली हो। हालांकि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पांच साल की इस नियमावली पर रोक लगा दी थी और 2018 के बाद से ही ये मामला लंबित है। हालांकि अब मामले में समय सीमा को 10 साल करते हुए संशोधित नियमावली लागू कर दी गई है। दूसरी तरफ उपनल कर्मचारी भी इस नियमावली के आने के बाद खुद को भी नियमित करने की मांग कर रहे हैं और सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने की बात कह रहे हैं।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।