Sanwaliya Seth Mandir Donation Record: भगवान कृष्ण के इस मंदिर में पैसों की बारिश! दान पेटी खुलते ही चौंक गए अधिकारी, इतने करोड़ रुपये के साथ मिले कीमती सोने-चांदी के आभूषण
Sanwaliya Seth Mandir Donation Record: भगवान कृष्ण के इस मंदिर में धन की वर्षा! दान पेटी खुलते ही चौंक गए अधिकारी, इतने करोड़ रुपये के साथ मिले कीमती सोने-चांदी के आभूषण
Sanwaliya Seth Mandir Donation Record/Image Source: IBC24
- सांवलिया सेठ मंदिर में आस्था का सैलाब
- भंडार में 46.58 करोड़ रुपये की भेंट
- सोना-चांदी भी चढ़ाया
Sanwaliya Seth Mandir Donation Record: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं की आस्था और उदारता का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। मंदिर के मासिक भंडार की सात चरणों में हुई गणना के बाद कुल 46 करोड़ 58 लाख रुपये की भेंट सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, भंडार की अंतिम चरण की गणना पूरी होने पर 36 करोड़ 57 लाख 87 हजार 642 रुपये नकद प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त भेंटकक्ष और ऑनलाइन डोनेशन के माध्यम से भी 10 करोड़ 45 हजार 282 रुपये की राशि मंदिर को मिली। इस तरह कुल दान राशि का आंकड़ा 46.58 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
सोना-चांदी की भी बड़ी भेंट (Sanwaliya Seth Temple)
Sanwaliya Seth Mandir Donation Record: नकद राशि के अलावा श्रद्धालुओं ने बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी अर्पित की। गणना के दौरान मंदिर को लगभग 2 किलो 967 ग्राम 480 मिलीग्राम सोना और 152 किलो 609 ग्राम चांदी प्राप्त हुई। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, यह भेंट श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रतीक है।
भगवान श्रीकृष्ण के सांवले स्वरूप की पूजा (Chittorgarh Temple Donation)
मंडफिया स्थित इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के सांवले स्वरूप की पूजा की जाती है। कृष्ण की मूर्ति का रंग सांवला होने के कारण भक्त उन्हें प्रेम से “सांवलिया सेठ” कहते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर भगवान भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उन्हें धन-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
1840 में मिली थी मूर्ति (Sanwaliya Seth Mandir News)
Sanwaliya Seth Mandir Donation Record: लोककथाओं के अनुसार, वर्ष 1840 में भोलाराम गुर्जर नाम के एक ग्वाले को सपने में भगवान कृष्ण के सांवलिया स्वरूप के दर्शन हुए। भगवान ने उसे बताया कि वे बागुंड गांव के एक स्थान पर जमीन के नीचे दबे हुए हैं। इसके बाद जब ग्रामीणों ने वहां खुदाई की तो भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियां निकलीं। इनमें से एक मूर्ति मंडफिया गांव में स्थापित की गई, जहां आगे चलकर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जो आज सांवलिया सेठ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
व्यापारी वर्ग की विशेष आस्था (Sanwaliya Seth Bhent)
राजस्थान के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में गिने जाने वाले इस मंदिर में राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में विराजमान यह प्रतिमा वही मानी जाती है जिसकी पूजा कभी प्रसिद्ध कृष्णभक्त मीराबाई किया करती थीं। यही कारण है कि विशेष रूप से व्यापारी वर्ग में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है। भक्तों का विश्वास है कि सांवलिया सेठ के दरबार में प्रार्थना करने से व्यापार में वृद्धि, आर्थिक समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
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