व्यंग्य, निष्पक्ष टिप्पणी की रक्षा की जानी चाहिए : ‘एक्स’ ने रामदेव की याचिका पर अदालत में कहा

व्यंग्य, निष्पक्ष टिप्पणी की रक्षा की जानी चाहिए : ‘एक्स’ ने रामदेव की याचिका पर अदालत में कहा

व्यंग्य, निष्पक्ष टिप्पणी की रक्षा की जानी चाहिए : ‘एक्स’ ने रामदेव की याचिका पर अदालत में कहा
Modified Date: February 17, 2026 / 09:10 pm IST
Published Date: February 17, 2026 9:10 pm IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि व्यंग्य, निष्पक्ष टिप्पणी और सार्वजनिक अभिव्यक्ति के दायरे में आने वाली किसी भी सामग्री की व्यक्तित्व अधिकार से जुड़े मामलों में हटाने के आदेशों से रक्षा की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह बाबा रामदेव द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई कर रही थीं, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि विभिन्न ऑनलाइन और सोशल मीडिया मंचों पर उनके व्यक्तित्व, छवि और पहचान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और उसका व्यावसायिक रूप से लाभ लिया जा रहा है।

‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के वकील ने व्यक्तित्व अधिकार से जुड़े मुकदमों में खातों को ‘‘अंधाधुंध’’ तरीके से ब्लॉक किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब सामग्री ‘‘अत्यंत आपत्तिजनक’’ नहीं है, तब ऐसे आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने रामदेव की याचिका में उल्लिखित एक पोस्ट ‘एक मीम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यंग्य है और लोकतंत्र में इसे संरक्षण प्राप्त है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह व्यंग्य है। यह व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन कैसे करता है, मैं समझ नहीं पा रहा। इसे संरक्षण प्राप्त है। व्यंग्य, निष्पक्ष टिप्पणी और सार्वजनिक अभिव्यक्ति व्यक्तित्व अधिकारों से सुरक्षित हैं। व्यंग्य लोकतंत्र का हिस्सा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना कोई लोकतंत्र नहीं हो सकता।’’

‘एक्स’ के वकील ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया मंच पर रामदेव के नाम से मौजूद एक आपत्तिजनक खाता केवल एक ‘पैरोडी’ खाता था, जिसे इस मामले में संरक्षण मिलना चाहिए।

इसी तरह, मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वकील ने भी कहा कि वे अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्री हटाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जब वैश्विक स्तर पर ‘ब्लॉक’ करने का आदेश मांगा जा रहा हो, तो किसी तीसरे पक्ष द्वारा ठोस व्यावसायिक लाभ दिखाया जाना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश आपत्तिजनक सामग्री समाचार संगठनों की है और यदि रामदेव को कोई शिकायत है, तो उन्हें गलत जानकारी के लिए उनके खिलाफ मुकदमा करना चाहिए।

‘एक्स’ और मेटा दोनों ने कहा कि उन्होंने कुछ आपत्तिजनक सामग्री को हटाया है।

रामदेव की ओर से पेश वकील ने कहा कि सोशल मीडिया मंचों को निष्पक्ष होना चाहिए और संबंधित सामग्री उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है।

अपनी याचिका में बाबा रामदेव ने कहा कि सोशल मीडिया मंचों पर कई संस्थाओं ने एआई-जनित डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ की गई तस्वीरें आदि प्रकाशित और प्रसारित की हैं, ताकि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा सके। यह उनके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है।

इस मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

भाषा

गोला पवनेश

पवनेश


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