न्यायालय ने विवादित भोजशाला स्थल पर बसंत पंचमी में हिंदुओं को दी पूजा करने की अनुमति

न्यायालय ने विवादित भोजशाला स्थल पर बसंत पंचमी में हिंदुओं को दी पूजा करने की अनुमति

न्यायालय ने विवादित भोजशाला स्थल पर बसंत पंचमी में हिंदुओं को दी पूजा करने की अनुमति
Modified Date: January 22, 2026 / 01:09 pm IST
Published Date: January 22, 2026 1:09 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल में शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने जबकि मुसलमानों को उसी दिन अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी है।

न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए।

हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी, शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुमति मांगी थी। इसी दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।

पीठ ने जिला प्रशासन को उस स्थान पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।

हिंदू लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है।

एएसआई की ओर से सात अप्रैल, 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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