न्यायालय ने केंद्र से ठोस कचरा संबंधी नियमों के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति पर दिशानिर्देश बनाने को कहा

न्यायालय ने केंद्र से ठोस कचरा संबंधी नियमों के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति पर दिशानिर्देश बनाने को कहा

न्यायालय ने केंद्र से ठोस कचरा संबंधी नियमों के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति पर दिशानिर्देश बनाने को कहा
Modified Date: August 4, 2026 / 09:25 pm IST
Published Date: August 4, 2026 9:25 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ‘ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026’ के तहत प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तहत जुर्माना लगाने और वसूलने के लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करे।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से एक हलफनामा दाखिल करने तथा नियमों को बनाने और जारी करने में हुई प्रगति की जानकारी रिकॉर्ड पर रखने को भी कहा।

पीठ ने हाल के एक फैसले का जिक्र किया जिसमें अदालत ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने के लिए एक जरूरी शर्त रखी थी कि दिया जाने वाला कोई भी मुआवजा उचित और तर्कसंगत होना चाहिए तथा उसका प्रदूषण फैलाने वाले द्वारा किए गए प्रदूषण से सीधा संबंध होना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति तर्कसंगत, उचित अनुपात और सही आकलन पर आधारित होनी चाहिए।’’

पीठ ने कहा, ‘‘राज्य के संबंधित अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे प्रदूषण फैलाने वाले से हुए नुकसान का आकलन करें और पर्यावरण को बहाल करने के लिए जरूरी मुआवजा वसूलें।’’

ये निर्देश अमरावती नगर निगम की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए।

पीठ ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन को संस्थागत रूप देने के लिए न केवल मजबूत कानूनों की जरूरत है, बल्कि उनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नियामक तंत्र और जवाबदेही की भी आवश्यकता है।

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र


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