नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) कैंसर से पीड़ित एक वरिष्ठ नागरिक को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कहा कि वह उसकी पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से संबंधित याचिका पर जल्द सुनवाई करे जो पिछले नौ वर्षों से लंबित है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उच्च न्यायालय से कहा कि 77 वर्षीय व्यक्ति के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और उनके मामले पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए।
शीर्ष अदालत राम शंकर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने कहा कि उनके मामले में निर्णय में अत्यधिक देरी से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी पद पर रहे शंकर ने अपनी याचिका में कहा कि ‘‘पेंशन कोई बख्शीश नहीं है’’, बल्कि यह कर्मचारी का अर्जित अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
याचिकाकर्ता ने एक जून 1970 से 28 मई 1985 तक सेवा दी। इसके बाद उन्होंने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) में सेवा शुरू की।
राज्य सरकार ने कुछ नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्हें पेंशन संबंधी लाभ देने से इनकार कर दिया।
शंकर ने 2017 में उच्च न्यायालय का रुख किया जहां मामला लंबित रहा और राज्य सरकार द्वारा समय मांगने के कारण कई बार स्थगित होता रहा।
भाषा गोला नरेश
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