Digital Arrest News/Photo Credit: IBC24
Digital Arrest News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर से डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ मोनिका नाम की महिला ने साइबर ठगों की प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड कर ली। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट भी मिले है। जिसमें उन्होंने एक युवक द्वारा लगातार परेशान किए जाने बात लिखी है।
परिजनों के मुताबिक, मोनिका पिछले कई दिनों से तनाव में थीं। बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 10 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा। इस दौरान उनसे पैसे भी ठग लिए गए और लगातार ब्लैकमेल किया जा रहा। था जिससे तंग आकर मोनिका ने ये खौफनाक कदम उठाया है।
हैरान करने वाली बात यह रही कि जब मोनिका की जब चिता जल रही थी, उस समय उनका फोन बजा। जब परिवार के किसी सदस्य ने कॉल उठाया, तो वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया, जिससे सुनियोजित साइबर ठगी के मामला का शक और गहरा गया।
मोनिका की बेटी ने बताया कि घटना से पहले उनकी मां काफी परेशान थीं और देर रात तक कुछ लिख रही थीं। बाद में वह एक सुसाइड नोट निकला, जिसमें उन्होंने अपने पति, बच्चों और परिवार से माफी मांगी और एक युवक द्वारा लगातार परेशान किए जाने और ब्लैकमेलिंग का जिक्र किया।
सुसाइड नोट में लिखी ये बात
मोनिका ने सुसाइड नोट में लिखा था- पति देव मैं, आपसे झूठ नहीं बोल सकती. मुझे आपसे बहुत सारी बात करनी है. मुझे आपको बहुत कुछ बताना है। मुझे बहुत दिन से एक लड़के ने बहुत परेशान कर रखा है। अब वो मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। आपसे बहुत प्यार करती हूं। प्लीज हो सके तो मुझे माफ कर देना और बच्चों का ध्यान रखना।
मेरे मरने के बाद दोबारा जन्म मिले तो आप ही मिलो। इसके बाद लिखा कि हमारी शादी की सालगिरह आ रही है। आगे लिखा कि यह पेपर मेरे घरवालों को दिखा देना। मम्मी-पापा और भाइयों सॉरी। सॉरी जिया, मम्मी को मरना ही पड़ेगा. उस लड़ने ने ज्यादा परेशान कर रखा है आपकी मम्मी को।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और साइबर ठगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
मोनिका ने बिजनौर में साइबर अपराधियों से परेशान होकर जान दे दी.
मोनिका डिजिटल अरेस्ट हो गई थी और इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि जब 👇
मोनिका की चिता जल रही थी, तब भी उनका फोन बज रहा था और जब फोन उठाया गया तो वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा.… pic.twitter.com/FbOn0wGVUx
— Govind Pratap Singh | GPS (@govindprataps12) April 30, 2026
जानिए क्या है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए व्यक्ति डरा धमकाकर पैसे ऐंठते है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचे?
डिजिटल अरेस्ट आज के समय में साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक खतरनाक तरीका है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI), या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें वीडियो कॉल के जरिए कैद (अरेस्ट) रहने पर मजबूर करते हैं।
1. घबराएं नहीं और कॉल काट दें
अगर कोई अनजान व्यक्ति आपको वीडियो कॉल पर यह कहकर डराता है कि आपके किसी पार्सल में ड्रग्स मिले हैं या आपका फोन किसी अवैध गतिविधि में शामिल है, तो तुरंत फोन काट दें। पुलिस या सीबीआई कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करके किसी को गिरफ्तार नहीं करतीं।
2. निजी जानकारी साझा न करें
धोखेबाज अक्सर आपकी निजी जानकारी, बैंक विवरण, या आधार कार्ड नंबर मांगते हैं।
3. आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें
यदि कोई आपको डराता है, तो उसकी बात पर यकीन करने के बजाय संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या उनके हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके सच्चाई का पता लगाएं।
4. डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी शब्द नहीं है
भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस को किसी को गिरफ्तार करने के लिए वैध वारंट साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता है और उनके पास वैध वारंट होना चाहिए।
5. तुरंत रिपोर्ट करें
अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन: 1930 पर कॉल करें। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर जानकारी दें।