तिरुवनंतपुरम, 30 अप्रैल (भाषा) सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी बी अशोक ने बृहस्पतिवार को केरल की वाम मोर्चा सरकार पर पलटवार करते हुए उसे “असहिष्णु” करार दिया।
अशोक को राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान मीडिया से बात करने और सरकारी नीतियों की आलोचना करने के कारण सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, सैनिक कल्याण विभाग में प्रधान सचिव और केरल कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक ने विधानसभा चुनावों के दौरान मीडिया को साक्षात्कार दिए थे और राजनीतिक एवं प्रशासनिक मामलों पर समाचार चैनलों की बहसों में हिस्सा लिया था, जिसके आधार पर उनके निलंबन का फैसला लिया गया था।
अशोक ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आदेश उन्हें निलंबित करने का कोई ठोस कारण नहीं स्थापित करता है।
उन्होंने कहा कि वह निलंबन आदेश को न तो अदालत में और न ही किसी केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती देंगे, क्योंकि यह नौ अप्रैल को जनता की ओर से “बर्खास्त” की गई सरकार का निलंबन आदेश है।
अशोक ने कहा, “यह आदेश अभी बरकरार रह सकता है। जब नयी सरकार सत्ता संभालेगी, तो इसे वापस ले लिया जाएगा और मुझे बहाल कर दिया जाएगा।”
उन्होंने दावा किया कि निलंबन आदेश जनवरी 2025 से सिविल सेवकों और खास तौर पर उनके खिलाफ सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का हिस्सा था।
अशोक ने कहा, “केरल आईएएस एसोसिएशन और मैंने यह सुनिश्चित किया था कि केरल में आईएएस कैडर के कामकाज के सिलसिले में वाम सरकार के ज्यादातर फैसले अधिसूचित अखिल भारतीय सिविल सेवा नियमों के अनुसार ही लिए जाएं।”
उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ उठाए गए सभी कदमों में उन्हें (सरकार) हार का सामना करना पड़ा और इसलिए अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्होंने यह मनगढ़ंत बहाना बनाकर मुझे निलंबित कर दिया कि मैंने मीडिया से बात की थी।”
अशोक ने कहा, “यह सरकार की घोर असहिष्णुता को दर्शाता है। वह चाहती है कि सरकारी कर्मचारी, जिनमें नौकरशाह भी शामिल हैं, उसके सेवक और चापलूस बन कर रहें। इसलिए मैं निलंबन आदेश को एक तमगा मानता हूं।”
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर की सेवानिवृत्ति के बाद एक पूर्व नौकरशाह के अब्राहम को मुख्य प्रधान सचिव के पद पर नियुक्त किया गया और उन्हें मुख्य सचिव के समकक्ष या उससे अधिक शक्तियां दी गईं।
अशोक ने कहा कि इससे सत्ता में दोहरापन उत्पन्न हुआ, जिसके मद्देनजर केरल आईएएस एसोसिएशन ने लंबे समय से सेवानिवृत्त नौकरशाहों को कैडर पदों पर बहाल करने और आईएएस पदों के संबंध में सरकार के विभिन्न अन्य निर्णयों के खिलाफ न्यायाधिकरण का रुख किया।
भाषा पारुल अविनाश
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