न्यायालय ने पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में कुत्तों से क्रूरता की रोकथाम संबंधी याचिका खारिज की

न्यायालय ने पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में कुत्तों से क्रूरता की रोकथाम संबंधी याचिका खारिज की

न्यायालय ने पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में कुत्तों से क्रूरता की रोकथाम संबंधी याचिका खारिज की
Modified Date: July 27, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: July 27, 2026 5:02 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह जानवरों के प्रजनन नियंत्रण केंद्रों और आश्रयों में कुत्तों के साथ होने वाली क्रूरता की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि कोई भी नगर निकाय या स्थानीय प्राधिकरण किसी पशु कल्याण संगठन को जानवरों के प्रजनन नियंत्रण अभियान के लिए तब तक काम पर न रखे, जब तक उसके पास एडब्ल्यूबीआई से वैध परियोजना मान्यता प्रमाणपत्र न हो।

जीव-जंतु प्रजनन नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार, सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के लिए कोई भी प्रजनन नियंत्रण कार्यक्रम तब तक नहीं चलाया जाएगा, जब तक कि स्थानीय प्राधिकरण या पशु कल्याण संगठन ने नियमों के तहत ऐसे कार्यक्रम को चलाने के लिए परियोजना मान्यता प्रमाणपत्र प्राप्त न कर लिया हो।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को परियोजना मान्यता प्रमाणपत्र के बारे में बताया।

वकील ने शीर्ष अदालत के 19 मई के फैसले का भी ज़िक्र किया, जिसमें कई निर्देश दिए गए थे। इनमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया था कि वे जानवरों के जन्म नियंत्रण ढांचे को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए समयबद्ध कदम उठाएं।

पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


लेखक के बारे में