न्यायालय ने ‘जी राजस्थान’ के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की

न्यायालय ने ‘जी राजस्थान’ के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की

न्यायालय ने ‘जी राजस्थान’ के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की
Modified Date: February 27, 2026 / 05:50 pm IST
Published Date: February 27, 2026 5:50 pm IST

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ‘ज़ी राजस्थान’ के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर राजस्थान पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि वह मामला दर्ज करने के तरीके से स्तब्ध है। यह प्राथमिकी ‘ज़ी मीडिया’ कंपनी की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

ज़ी राजस्थान के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख आशीष दवे के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी को शिकायत दर्ज करने से पहले पड़ताल करनी चाहिए थी और आरोपों की पुष्टि करनी चाहिए थी।

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा, ‘‘जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई, उससे हम स्तब्ध हैं। प्राथमिकी और शिकायत में जबरन वसूली का कौन सा विशेष आरोप, कंपनी में अपने पद का दुरुपयोग करने का कौन सा विशेष अपराध बताया गया, जिसके आधार पर संबंधित थाने को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने की आवश्यकता पड़ी? जबकि कोई आरोप ही नहीं था! यह सब मनगढ़ंत कहानी है।’’

अदालत ने कहा कि प्राथमिकी केवल इसलिए दर्ज की गई क्योंकि शिकायतकर्ता (मीडिया कंपनी) एक प्रभावशाली एजेंसी है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर कोई आम नागरिक थाने जाए, तो क्या आप ऐसी प्राथमिकी दर्ज करेंगे? इस प्राथमिकी में कुछ भी नहीं है। सिर्फ इसलिए कि शिकायतकर्ता एक प्रभावशाली एजेंसी है, आपने यूं ही प्राथमिकी दर्ज कर ली।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप चाहें तो हम राजस्थान पुलिस के आचरण पर गंभीर टिप्पणी कर रहे हैं। यह क्या प्राथमिकी है? अगर कोई आम नागरिक थाने जाता है, तो उसे ऐसे आरोप लगाने पर बाहर निकाल दिया जाएगा। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे आप नकार नहीं सकते। शिकायतकर्ता इतना विशेषाधिकार प्राप्त था कि उसके लिए पुलिस ने लाल कालीन बिछाया और प्राथमिकी दर्ज की। क्या यह जेम्स बॉन्ड है? पहले गोली चलाओ, बाद में सोचो?’’

दवे ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिसमें उनके खिलाफ प्राथमिकी को निरस्त करने से इनकार कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया था, ‘‘मीडिया पेशेवरों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे धमकी या जबरन वसूली के माध्यम से किसी को भी अनुचित नुकसान पहुंचाने से बचें।’’

चैनल प्रबंधन ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोपों पर जयपुर के अशोक नगर थाने में अपने तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख दवे और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

दवे ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने जयपुर पुलिस को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने और सबूत पेश करने का निर्देश दिया था।

भाषा

नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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