अहमदाबाद, पांच मई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे नारायण साई की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 2001 के बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया था।
सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ साई की अपील उच्च न्यायालय में लंबित है।
सोमवार को पारित एक आदेश में, न्यायमूर्ति इलेश वोरा और न्यायमूर्ति आर टी वच्छानी की खंडपीठ ने साई की याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए, ‘‘हमारे लिए प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है कि आवेदक-दोषी को (अपीलीय न्यायालय से) बरी होने का उचित मौका है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए, गुण-दोष के आधार पर, हमें सजा के निलंबन और जमानत देने के संबंध में कोई पर्याप्त आधार नहीं मिलता है।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि हालांकि साई 11 साल जेल की सजा काट चुका है लेकिन उसने 2019 से अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया है। उसने कई बार याचिका दायर कर अस्थायी या स्थायी जमानत पाने की कोशिश की है।
पीठ ने कहा कि उसे अपनी अपील की शीघ्र सुनवाई में दिलचस्पी नहीं थी और उसने कार्यवाही में देरी के लिए कई हथकंडे अपनाए।
वर्ष 2013 में एक पूर्व महिला भक्त ने साई के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था और अप्रैल 2019 में सूरत की एक अदालत ने उसे मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
भाषा अविनाश आशीष
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