न्यायालय ने एमके स्टालिन के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

न्यायालय ने एमके स्टालिन के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

न्यायालय ने एमके स्टालिन के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
Modified Date: February 19, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: February 19, 2026 4:30 pm IST

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता एमके स्टालिन के खिलाफ दाखिल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के नेता सैदाई एस. दुरईसामी की चुनाव याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

याचिका में स्टालिन पर 2011 के विधानसभा चुनावों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे हालांकि मद्रास उच्च न्यायालय ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद दुरईसामी ने शीर्ष अदालत का रुख किया।

न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 2017 में दुरईसामी की चुनाव याचिका खारिज कर दी थी।

दुरईसामी 2011 के विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट पर स्टालिन से 2,739 वोटों से हार गए थे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को निर्धारित व्यय सीमा से अधिक धन वितरित किया गया था, साथ ही पूरक मतगणना भी कराई गई थी।

दुरईसामी ने द्रमुक पर अपने पदाधिकारियों और धन का इस्तेमाल कर मतदाताओं को लुभाने के लिए नए-नए तरीके अपनाने का भी आरोप लगाया था, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। अन्नाद्रमुक नेता ने कहा कि द्रमुक ने मतदाताओं को ‘तिरुमंगलम फॉर्मूला’ के तहत सामुदायिक भोजन वितरण, कूरियर सेवा, अखबारों में मुद्रा और उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद के लिए पर्चियों के माध्यम जैसे ‘अनोखे’ तरीके से धन उपलब्ध कराया था।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत


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