न्यायालय ने सीएपीएफ कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब किया
न्यायालय ने सीएपीएफ कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब किया
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि यह कानून शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ 34 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नया कानून सीएपीएफ में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने के अदालतों के पूर्व फैसले को निष्प्रभावी करता है।
शीर्ष अदालत ने इस याचिका को पहले से लंबित मामलों के साथ संलग्न कर दिया।
अधिकारियों की ओर से दायर याचिका में कानून को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन करता है।
संसद ने दो अप्रैल को सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक पारित किया था।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले अक्टूबर 2025 में केंद्र की एक पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था।
केंद्र ने पुनर्विचार याचिका में उच्चतम न्यायालय के मई 2025 के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया था।
न्यायालय ने फैसले में निर्देश दिया था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को ‘‘क्रमिक रूप से कम’’ किया जाए और छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा कराई जाए।
इन 34 अधिकारियों ने अपनी याचिका में कहा कि नए सीएपीएफ अधिनियम ने पिछले वर्ष के न्यायिक फैसलों को निष्प्रभावी कर दिया है, जबकि उन फैसलों के कानूनी आधार को समाप्त नहीं किया गया है।
याचिका में कहा गया कि विधायिका को कानून में पूर्व प्रभाव से संशोधन करने का अधिकार है लेकिन वह उन खामियों को दूर किए बिना या उस कानूनी आधार में बदलाव किए बिना न्यायिक आदेशों को केवल निष्प्रभावी नहीं कर सकती, जिसके आधार पर फैसला दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने 23 मई, 2025 को दिए अपने आदेश में केंद्र को निर्देश दिया था कि वह आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एसएसबी समेत सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) में लंबित कैडर समीक्षा को छह महीने के भीतर पूरा करे।
यह कैडर समीक्षा वर्ष 2021 में होनी थी।
अदालत ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को निर्देश दिया था कि वह गृह मंत्रालय से कैडर समीक्षा तथा मौजूदा सेवा नियमों और भर्ती नियमों की समीक्षा के संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट मिलने के तीन महीने के भीतर उचित निर्णय ले।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश

Facebook


