न्यायालय ने सभी अदालतों में लैंगिक संवेदनशीलता समितियों के गठन पर उच्च न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी

न्यायालय ने सभी अदालतों में लैंगिक संवेदनशीलता समितियों के गठन पर उच्च न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी

न्यायालय ने सभी अदालतों में लैंगिक संवेदनशीलता समितियों के गठन पर उच्च न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी
Modified Date: January 6, 2026 / 08:40 pm IST
Published Date: January 6, 2026 8:40 pm IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने महिला वकीलों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम और निवारण के लिए प्रभावी आंतरिक तंत्र स्थापित करने की याचिका पर मंगलवार को विभिन्न उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों से वस्तु स्थिति रिपोर्ट मांगी।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ विशाखा दिशा-निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निर्देश मांगने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देश के उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में आंतरिक शिकायत समितियों की स्थापना भी शामिल है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सोनिया माथुर ने अदालत के समक्ष एक चार्ट प्रस्तुत किया जिसमें अनुपालन में महत्वपूर्ण कमियों को दर्शाया गया था।

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उन्होंने कहा, ‘‘सात उच्च न्यायालय ऐसे हैं जहां कोई दिशा-निर्देश या नियम नहीं बनाये गये।’’

शीर्ष अदालत ने संबंधित उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने बार के सदस्यों और सभी हितधारकों के लिए उच्चतम न्यायालय के भीतर लैंगिक संवेदनशीलता और आंतरिक शिकायत समिति (जीएसआईसीसी) का गठन करके पहले ही सक्रिय कदम उठाए हैं।

इसमें कहा गया है कि हालांकि, उच्च न्यायालयों, जिला अदालतों, न्यायाधिकरणों या बार एसोसिएशनों में ऐसी कोई समान संरचना मौजूद नहीं है, जिस कारण महिलाओं के लिए संस्थागत संरक्षण में कमी है।

भाषा नोमान नरेश

नरेश


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