नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर शुक्रवार को सहमति जताई जिसमें देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति वी. मोहना जो प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ की सदस्य थीं, ने 18 अगस्त को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने कहा था कि वह पहले इस मामले में वरिष्ठ वकील के रूप में पेश हो चुकी हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत नीत पीठ के समक्ष मामले में न्याय मित्र की भूमिकर निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने तत्काल कुछ निर्देश जारी करने की जरूरत बताई।
हंसारिया ने कहा, ‘‘ यह सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरणों की त्वरित सुनवाई से जुड़ा मामला है। करीब 40 प्रतिशत जनप्रतिनिधि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इसे तत्काल सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और अंतरिम निर्देश दिए जाने चाहिए।’’
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हां, इसे सूचीबद्ध किया जाएगा।’’
हंसारिया ने, राजनीति के अपराधीकरण पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि लोकसभा के 543 में से 251 सदस्यों और राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उच्चतम न्यायालय में दाखिल उनके हलफनामे के अनुसार, सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं।
हंसारिया ने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा मामलों की निगरानी के बावजूद, 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग समान स्तर पर बनी हुई है।
भाषा शोभना मनीषा
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