जुबिन गर्ग की सदाबहार गुनगुनाहट की लोकप्रियता के पीछे विज्ञान : अनुसंधानकर्ता
जुबिन गर्ग की सदाबहार गुनगुनाहट की लोकप्रियता के पीछे विज्ञान : अनुसंधानकर्ता
गुवाहाटी, 11 जून (भाषा) मशहूर गायक एवं संगीतकार जुबिन गर्ग ने दशकों तक अपनी खास गुनगुनाहट से अनगिनत प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इस गुनगुनाहट के पीछे असल में ध्वनि के गुणों से संबंधित विज्ञान है जो आवाज को मधुर और सुरीला बनाने के साथ भावपूर्ण बनाता है। यह दावा हैंडिक गर्ल्स कॉलेज के दो अनुसंधानकर्ताओं ने किया है।
इनका कहना है कि जुबिन की गुनगुनाहट की सबसे बड़ी खासियत समय के साथ ध्वनि का उतार-चढ़ाव, पैटर्न और आवृत्ति का सटीक संतुलन था।
दरअसल उनकी गुनगुनाहट की वैज्ञानिक आवृत्ति, संचरण बारम्बरता इतनी सटीक थी कि लोगों में जोश का संचार करके उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ती थी।
ध्वनि की आवृत्ति, संचरण बारम्बरता जैसी विशेषताओं को संयुक्त रूप से ‘ध्वानिक गुणधर्म’ कहते हैं । ये विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि ध्वनि तरंगें उनके भीतर कैसे व्यवहार करती हैं।
भौतिक शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर किशोर दत्ता और ज्योत्स्ना सैकिया ने ‘‘क्वांटिटेटिव एक्यूस्टिक प्रोफाइलिंग ऑफ जुबिन गर्ग्स हमिंग: टेम्पोरल पैटर्निंग एंड स्पेक्ट्रल बैलेंस’’ (जुबिन गर्ग की गुनगुनाने का मात्रात्मक ध्वनिक प्रोफाइलिंग: समयगत परिपाटी और स्पेक्ट्रल संतुलन )शीर्षक से प्रकाशित अनुसंधानपत्र में जुबिन गर्ग की आवाज की खासियत को समझने की कोशिश की है।
अनुसंधान पत्र में कहा गया, ‘‘जुबिन गर्ग की गायन शैली अपनी विशिष्ट गुनगुनाहट के लिए जानी जाती है। उनकी गुनगुनाहट अक्सर एक ऐसे विशेष संगीतात्मक पहचान के रूप में कार्य करती है जो भाषाई सीमाओं से परे होती है। संवाददाताओं और श्रोताओं ने उनकी गुनगुनाहट को ‘सुकून दायक’, ‘भावपूर्ण’ और ‘आकर्षक’ बताया है।’’
अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ‘‘लोगों को जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट इसलिए पसंद नहीं आती कि उसमें कोई शब्द या भाषा का अर्थ होता है, बल्कि इसलिए कि उनकी ध्वनि की बनावट, लय, संरचना और आवाज़ के भावपूर्ण ध्वानिक गुणधर्म श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं।’’
इस अनुसंधानपत्र को ‘जर्नल ऑफ वॉइस’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक गुनगुनाहट भारतीय लोकप्रिय संगीत की एक अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका अपना अलग स्थान और पहचान है।
अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ‘‘जुबिन गर्ग की गुनगुनाने की शैली बहुत सहज, मधुर और भावनात्मक है। इसलिए यह समझने के लिए वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना जरूरी है कि उनकी आवाज और गुनगुनाहट में ऐसा क्या खास है जो लोगों को इतना आकर्षित करता है।’’
अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ‘‘अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि उनकी आवाज के कौन-कौन से मापे जा सकने वाले गुण उनकी गुनगुनाहट को इतना अलग, पहचानने योग्य और आकर्षक बनाते हैं।’’
अनुसंधान पत्र के मुताबिक अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आवाज के कई तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जिनमें स्वर में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव, आवाज की तीव्रता में सूक्ष्म बदलाव, आवाज की स्पष्टता और उसमें शोर का स्तर, ध्वनि कितनी खुरदरी या मखमली है,ध्वनि की ऐसी विशेषताएं जो मानव श्रवण प्रणाली के अनुसार आवाज की पहचान करने में मदद करती हैं शामिल हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया, ‘‘ अध्ययन में पाया गया कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का अपना एक अलग समयगत ढांचा और शैली है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट और उनके सामान्य गायन की आवाज़ की मूल सुर-आवृत्ति में स्पष्ट अंतर है। इसके अलावा, उनकी गुनगुनाहट में स्वर की सूक्ष्म स्थिरता अन्य गायकों की तुलना में अलग पाई गई, जो उनकी आवाज़ की विशिष्ट पहचान का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।’’
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन के दौरान हमें जुबिन की आवाज की बनावट और ध्वनि-गुणों से जुड़े कई मापदंडों (एमएफसीसी) में उल्लेखनीय अंतर मिले। इससे पता चलता है कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट की ध्वनि-रचना कुछ मामलों में अन्य आवाज़ों से अलग है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट अपेक्षाकृत थोड़ी खुरदरी प्रतीत हुई, लेकिन इन अंतर को वैज्ञानिक रूप से निर्णायक नहीं माना गया।’’
अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे की कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट के प्रति आकर्षण केवल श्रोताओं की धारणा की वजह से नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से मापे जा सकने वाले ध्वनि-गुणों के आधार पर भी विशिष्ट और अलग पहचान रखती है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वे अपने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए लोगों से जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट को सुनाकर उनकी राय नहीं ली, बल्कि ध्वनि-विज्ञान और मनोध्वनिकी के पहले से स्थापित वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर निष्कर्ष निकाले। इन अध्ययनों में कुछ ध्वनिक गुण यह समझाने में मदद करते हैं कि किसी आवाज़ को लोग कितना मधुर, गर्माहट भरा और स्थिर महसूस करते हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अनुसंधानपत्र में लिखा कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट में लय, स्वर और ध्वनि-संरचना से जुड़े कुछ खास गुणों का ऐसा मेल है जिसे वैज्ञानिक रूप से मापा जा सकता है। यही गुण शायद उनकी गुनगुनाहट को गहराई और आकर्षण प्रदान करती है, जिसे श्रोता महसूस करते हैं।
प्रख्यात गायक जुबिन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ के चौथे संस्करण में शामिल होने के लिए पूर्वी एशिया के द्विपीय देश गए थे।
भाषा धीरज संतोष
संतोष

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