Mungeli Social Boycott Case : योग्यता देखकर किया था दामाद का फैसला, बदले में मिला सामाजिक बहिष्कार का ऐसा दंश की सगे रिश्तेदारों ने भी मोड़ लिया मुंह

मुंगेली जिले के झलियापुर गांव में एक परिवार का आरोप है कि बेटी की दूसरी ठाकुर उपजाति में शादी कराने के बाद उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। परिवार का दावा है कि तीन साल से उन्हें गांव, रिश्तेदारों और सामाजिक आयोजनों से दूर रखा जा रहा है।

Mungeli Social Boycott Case : योग्यता देखकर किया था दामाद का फैसला, बदले में मिला सामाजिक बहिष्कार का ऐसा दंश की सगे रिश्तेदारों ने भी मोड़ लिया मुंह

Mungeli Social Boycott Case / Image Source : file


Reported By: Sourabh Dubey,
Modified Date: June 11, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: June 11, 2026 4:07 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बेटी की दूसरी ठाकुर उपजाति में शादी के बाद विवाद
  • परिवार पिछले 3 साल से सामाजिक बहिष्कार झेलने का दावा कर रहा
  • 13 गांवों में मुनादी कर संबंध तोड़ने का आरोप

मुंगेली : Mungeli Social Boycott Case :  शिक्षा, आधुनिक सोच और बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखने वाले एक परिवार को आखिर ऐसी कौन सी सजा मिली कि गांव में उनसे मिलना-जुलना और साथ खाना-पीना बंद कर दिया गया। रिश्तेदारों ने नाता तोड़ लिया, भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने तक नहीं दिया गया, पुश्तैनी शिव मंदिर के दर्शन तक बंद हो गए और सामाजिक बहिष्कार का ऐसा दंश मिला कि पूरा परिवार वर्षों से अपनों के बीच भी बेगाना बनकर जी रहा है।पूरा मामला मुंगेली जिले के झलियापुर गांव का है, जहां बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज के एक परिवार का आरोप है कि दूसरे ठाकुर समाज में बेटी की शादी करने पर उन्हें समाज से बाहर कर दिया गया है।

पिछले तीन साल से झेल रहा बहिष्कार का दर्द

नम आंखें, माथे पर चिंता की लकीरें… ये उस बेबस परिवार की कहानी है, जिसे समाज के ठेकेदारों ने अन्य लोगों से मिलना-जुलना, खाना-पीना, यहां तक कि बात करना भी बंद कर दिया। Buxar Rajput Kshatriya Samaj Mungeli इसका दंश यह परिवार पिछले तीन वर्षों से झेलने को मजबूर है।मुंगेली जिले के अंतिम छोर पर बसे झलियापुर गांव में रहने वाले संतोष सिंह क्षत्रिय का परिवार पिछले तीन वर्षों से सामाजिक बहिष्कार का दर्द झेल रहा है। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी महासमुंद मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि बेटा सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद अब कानून की पढ़ाई कर रहा है।

दूसरे ठाकुर समाज में संपन्न हुई शादी

माता-पिता ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाई और उनकी योग्यता के अनुसार विवाह करने का निर्णय लिया। परिवार के अनुसार, समाज में उनकी बेटी की शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप योग्य वर नहीं मिला। वर्ष 2022 में उनकी छोटी बेटी, जो एक्सिस बैंक में कार्यरत है, की शादी दूसरे ठाकुर समाज में संपन्न हुई।इसी के बाद बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

परिवार के घर आने-जाने वालों को भी चेतावनी

समाज के पदाधिकारियों ने परिक्षेत्र के 13 गांवों में मुनादी कराकर इस परिवार से किसी भी प्रकार का सामाजिक संबंध नहीं रखने का फरमान जारी किया। इतना ही नहीं, जो लोग इस परिवार के घर आते-जाते थे, उन्हें भी बहिष्कार की चेतावनी और लिखित नोटिस दिए जाते रहे। धीरे-धीरे गांव और रिश्तेदारी के लोगों ने बातचीत तक बंद कर दी।सामाजिक बहिष्कार का असर परिवार के जीवन और आजीविका पर भी पड़ा। संतोष सिंह द्वारा 24 वर्षों से संचालित स्कूल में कभी 350 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन बहिष्कार के बाद छात्रों की संख्या घटकर महज 65 रह गई। खेती-किसानी भी प्रभावित हुई और लगभग 10 एकड़ भूमि पर खेती नहीं हो पा रही है। मजदूर और सहयोगी नहीं मिलने के कारण बाहर के गांवों से लोगों को बुलाकर काम कराना पड़ रहा है।सामाजिक बहिष्कार का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि उन्हें अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने तक नहीं दिया गया।

पुश्तैनी शिव मंदिर में भी लोगों का जाना बंद

सुख-दुख के हर अवसर पर अपने ही रिश्तेदारों और परिचितों ने दूरी बना ली। यहां तक कि गांव के उस पुश्तैनी शिव मंदिर में भी उनका जाना बंद हो गया, जिससे उनकी पीढ़ियों की आस्था जुड़ी हुई है। Santosh Singh Kshatriya Mungeli पीड़ित परिवार ने पुलिस, प्रशासन और न्यायालय के दरवाजे भी खटखटाए, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। फिलहाल यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में लंबित है।इस मामले पर पीड़ित संतोष सिंह के ससुर, जो पुलिस विभाग से डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने बताया कि इस परिवार से रिश्ता रखने की वजह से उनके परिवार का भी बहिष्कार किया गया। उल्लेखनीय है कि बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज का पंजीयन भी उन्होंने ही करवाया था।

समाज में शामिल करने के लिए लाखों रुपये की मांग

समाज से बहिष्कृत करने के जारी फरमान के बाद गांव में भी मेलजोल और बातचीत बंद कर दी गई। समाज में किसी तरह का निमंत्रण देने के लिए गांव के श्रीवास को भी मना कर दिया गया। बहिष्कार का दंश सिर्फ यही परिवार नहीं, बल्कि कई अन्य परिवार भी इसी तरह की सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होने का आरोप लगा रहे हैं।आरोप है कि दूसरी ठाकुर उपजाति में विवाह करने वाले कुछ परिवारों से समाज में पुनः शामिल करने के नाम पर लाखों रुपये की मांग की गई।

एडीएम ने दिया उचित जांच का भरोसा

एक परिवार से तो कथित रूप से 11 लाख रुपये की मांग का लिखित दस्तावेज होने का भी दावा किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि इस परंपरा का असर केवल सामान्य लोगों पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और उच्च पदों पर कार्यरत लोगों पर भी पड़ा है। कई प्रतिष्ठित परिवारों को भी इसी प्रकार सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा है।इस मामले का संज्ञान मुंगेली के एडीएम अजय शतरंज को दिए जाने पर उन्होंने विशेष टीम से इसकी जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। साथ ही उन्होंने समाज के उन प्रतिनिधियों से अपील की है, जिनके नेतृत्व में पूरा समाज चलता है, कि वे बहिष्कार जैसी कुप्रथा से बचें, सामाजिक समरसता बनाए रखें और समाज को एकजुट रखकर सामाजिक उत्थान की दिशा में कार्य करें।

सामाजिक बहिष्कार जैसी परंपराएं खड़े कर रही हैं गंभीर सवाल

समाज सुधार, शिक्षा और आधुनिक सोच के इस दौर में सामाजिक बहिष्कार जैसी परंपराएं कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। क्या किसी परिवार को अपनी संतान की पसंद और योग्यता के अनुसार विवाह कराने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी चाहिए? और यदि सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाएं सच हैं, तो क्या यह संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों का उल्लंघन नहीं है?

न्यायालय में विचाराधीन है मामला

झलियापुर का यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक परंपराओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव की एक बड़ी तस्वीर भी पेश करता है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन इस मामले पर प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संतोष राजपूत जैसे अन्य परिवारों को इस तरह की प्रताड़ना का दंश न झेलना पड़े।

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and news producer at IBC24. A Gold Medalist in Journalism and Mass Communication, I specialize in news production, content writing, and digital storytelling. With a keen interest in political and crime reporting, I believe in delivering accurate, ethical, and impactful journalism that informs and connects with people.